Thursday, July 23, 2026

पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को लिखा पत्र, अजीत महतो मौत की हो न्यायिक जांच

रांची: पूर्व मुख्यमंत्री सह भाजपा नेता अर्जुन मुंडा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर पुलिस की पिटाई से हुई अजीत महतो के मौत मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की है। अपने पत्र में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने लिखा कि इस घटना ने एक बार फिर से झारखंड में मानवाधिकार उल्लंघन मामले की कलई खोल दी है। ऐसे में इस मामले की न्यायिक जांच ही इस घटना के सत से पर्दा उठा सकता है।
सेवा में,
माननीय अध्यक्ष महोदय,
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
नई दिल्ली
विषयः झारखंड राज्य के जमशेदपुर (मानगो) क्षेत्र में श्री अजीत महतो की पुलिस अभिरक्षा में हुई मृत्यु के संबंध में मानवाधिकार उल्लंघन की स्वतंत्र एवं न्यायिक जांच हेतु।
महोदय,
मैं आपका ध्यान झारखंड राज्य के जमशेदपुर अंतर्गत मानगो, गोकुल नगर बस्ती निवासी श्री अजीत महतो की दिनांक 30 दिसंबर 2025 को पुलिस अभिरक्षा में हुई मृत्यु की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ। यह घटना प्रथम दृष्टया संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त जीवन एवं गरिमा के अधिकार तथा स्थापित मानवाधिकार मानकों के गंभीर उल्लंघन का विषय प्रतीत होती है। यह अत्यंत चिंताजनक है कि बिना किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच के, मात्र एक अप्राकृतिक मृत्यु (यू.डी.) प्रकरण दर्ज कर मृतक के परिजनों को सादे कागज पर जबरन हस्ताक्षर करवाकर ₹200000 की राशि थमा दी गई। जिसके वैधानिक आधार एवं प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। इससे प्रकरण की पारदर्शिता एवं निष्पक्षता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
यह भी तथ्य है कि गिरफ्तारी के पश्चात लगभग दो दिनों तक परिजनों को मृतक से मिलने की अनुमति नहीं दी गई एवं जिससे यह प्रतीत होता है कि पुलिस यातना से ही इनकी मृत्यु हुई है। इसी अवधि में मृतक की गर्भवती पत्नी ने एक नवजात कन्या को जन्म दिया। श्री अजीत महतो अपने परिवार के एकमात्र आजीविका अर्जक थे। परिणामस्वरूप एक परिवार गंभीर सामाजिक, आर्थिक एवं मानसिक संकट में आ गया है। पुलिस अभिरक्षा में किसी नागरिक की मृत्यु स्वयं में एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है, जिसकी जांच स्वतंत्र, उच्चस्तरीय एवं न्यायिक प्रकृति की होनी अनिवार्य है।
अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि- इस प्रकरण का स्वतः संज्ञान (Suo Moto Cognizance) लेते हुए स्वतंत्र एवं न्यायिक जांच सुनिश्चित की जाए। दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों/अधिकारियों के विरुद्ध कठोर विधिक एवं विभागीय कार्रवाई की जाए। मृतक के परिजनों को न्यायोचित एवं सम्मानजनक मुआवजा, पुनर्वास एवं आवश्यक सुरक्षा प्रदान की जाए। मुझे विश्वास है कि माननीय आयोग इस गंभीर एवं संवेदनशील मानवाधिकार प्रकरण में शीघ्र हस्तक्षेप कर न्याय सुनिश्चित करेगा।
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एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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