Tuesday, September 15, 2026

आठ साल बाद मिला न्याय: हाई कोर्ट ने बाल सुधार गृह के बर्खास्त कर्मचारियों की सेवा बहाल करने का दिया आदेश

राँची: झारखंड हाई कोर्ट ने बोकारो बाल सुधार गृह के बर्खास्त कर्मचारियों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस दीपक रौशन की एकल पीठ ने आज, 27 नवंबर 2025 को इन कर्मचारियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए, उनकी सेवा तत्काल बहाल करने का आदेश दिया है।

यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जिन्हें वर्ष 2017 में एक साल की सेवा के बाद नियमित कर्मचारी से हटाकर दैनिक वेतन भोगी बना दिया गया था, और बाद में उनकी सेवा ही समाप्त कर दी गई थी।

क्या है पूरा मामला?

मामला वर्ष 2016 से जुड़ा है, जब बोकारो के तत्कालीन उपायुक्त ने बाल सुधार गृह में आठ पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था। इंटरव्यू के बाद बाल मुकुंद प्रजापति, संदीप कुमार, राजेश कुमार सहित आठ लोगों को नियुक्त किया गया। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उनकी नियुक्ति नियमित कर्मचारियों की तरह हुई, उनका सर्विस बुक खोला गया और उन्हें नियमित वेतन का भुगतान किया गया। सुनवाई के दौरान सरकार ने स्वीकार किया कि ये नियुक्तियाँ संविदा के आधार पर होनी थीं, लेकिन गलती से उनका सर्विस बुक खोल दिया गया। गलती पकड़ में आने पर, जनवरी 2018 से इन कर्मचारियों की नियमित सेवा समाप्त कर दी गई और उन्हें दैनिक मजदूर बना दिया गया।

ऐसे गलती सुधारना सही नहीं- हाई कोर्ट

न्यायालय ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद 27 नवंबर 2025 फैसला सुनाया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि बाल सुधार गृह में नियुक्त इन कर्मचारियों का योगदान स्वीकार किया गया, सर्विस बुक खोला गया और नियमित वेतन का भुगतान किया गया। लेकिन सरकार को अपनी गलती का पता लगने के बाद इन कर्मचारियों के सेवा एक महीने का नोटिस देकर समाप्त कर दिया गया। अदालत ने कहा कि अपनी गलती सुधारने के लिए सेवा समाप्त करने के लिए जारी किया गया आदेश कानून की नजर में सही नहीं है।

कोर्ट ने तत्काल सेवा समाप्त करने के आदेश को रद्द करते हुए इन कर्मचारियों की सेवा बहाल करने का निर्देश दिया है। इस फैसले से कर्मचारियों को आठ साल बाद न्याय मिला है और उन्हें नियमित सेवा का लाभ मिल सकेगा।

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