Wednesday, November 4, 2026

PMCH के ECG रुम में महिला मरीज से छेड़छाड़, प्राथमिकी की गई दर्ज

पटना: पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में इलाज के दौरान एक युवती से छेड़छाड़ के सनसनीखेज मामले में जाँच तीसरे दिन भी किसी निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुँच पाई है। पुलिस टीम ने रविवार को ईसीजी (ECG) रूम और परिसर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, लेकिन ईसीजी कक्ष में कैमरा न होने के कारण घटना के स्पष्ट सबूत नहीं मिल पाए हैं। फिलहाल, पुलिस कर्मियों, आरोपित ईसीजी कर्मी और अन्य कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है, जबकि सभी आरोपी छेड़छाड़ की बात से इनकार कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार सालिमपुर अहरा निवासी 20 वर्षीय युवती सांस लेने में परेशानी होने पर शुक्रवार की आधी रात पीएमसीएच के इमरजेंसी वार्ड गई थी। डॉक्टरों की सलाह पर जब वह ईसीजी कराने गई, इस दौरान ही युवती ने छेड़छाड़ होने का आरोप लगाया। युवती का आरोप है कि ईसीजी जाँच करने के दौरान वहां मौजूद पुरुष स्वास्थ्य कर्मी ने गलत इरादे से उसके निजी अंगों को कई बार छुआ। जिसके बाद महिला एवं उनके परिजनों द्वारा इसका विरोध करने लगे लेकन किसी ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया। साथ ही ड्यूटी पर मौजूद गार्ड ने भी पीड़िता के परिजनों के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की की। जिसके बाद पीड़िता की शिकायत पर शनिवार, 22 नवंबर को पीरबहोर थाने में IPC की संबंधित धाराओं के तहत छेड़खानी का केस दर्ज किया गया।

पुरुष कर्मी ही करते हैं महिला का ईसीजी

जाँच के दौरान पुलिस ने अस्पताल प्रशासन से यह सवाल किया कि महिला का ईसीजी पुरुष कर्मी क्यों कर रहा था? जिसपर अस्पताल प्रबंधन ने जवाब दिया कि फिलहाल पुरुष कर्मी ही ECG का कार्य करते हैं। साथ ही बताया कि ECG के दौरान इलेक्ट्रोड सीने पर कई जगह चिपकाए जाते हैं। इसपर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि यह कार्य महिला कर्मी करती तो शायद यह बखेड़ा ही नहीं होता।

पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों पर ही निर्भर है मामला

अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज में पीड़िता अपनी छोटी बहन के साथ ईसीजी कक्ष में जाती तो दिख रही है, लेकिन कक्ष के अंदर की फुटेज उपलब्ध न होने के कारण पुलिस को अब पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।

डीएसपी टाउन-1 राजेश रंजन ने बताया कि, “जाँच जारी है और सभी संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। स्पष्ट सबूतों के आधार पर ही निष्कर्ष पर पहुँचा जाएगा।”

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में महिला सुरक्षा और संवेदनशील जाँच प्रक्रियाओं के दौरान महिला स्टाफ की अनिवार्यता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एयर नाऊ स्पेशल

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