झारखंड : झारखंड में नगर निकाय चुनाव को लेकर दायर एक याचिका पर बुधवार को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। यह याचिका शांतनु कुमार चंद्र ने दायर की है। याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार द्वारा नगर निगमों को दो श्रेणियों (वर्ग ‘क’ और वर्ग ‘ख’) में बांटने की नीति को चुनौती दी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि 2011 की जनगणना के आधार पर धनबाद नगर निगम में मेयर का पद अनारक्षित रखा गया है, जबकि गिरिडीह नगर निगम में मेयर का पद अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित कर दिया गया है।
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उनके अनुसार यह वर्गीकरण और आरक्षण नीति जनसंख्या के आधार पर तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने दावा किया कि सरकार का यह निर्णय मनमाना और असंगत है। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को अपने-अपने पक्ष में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी।
क्यों अहम है यह मामला?
नगर निकाय चुनावों में मेयर और अन्य पदों के आरक्षण का सीधा असर स्थानीय राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ता है। इसलिए इस याचिका पर आने वाला फैसला राज्य की कई नगर निगमों में चुनाव प्रक्रिया और आरक्षण व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। झारखंड में नगर निकाय चुनाव लंबे समय से टलते आ रहे हैं, ऐसे में हाई कोर्ट की यह सुनवाई और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


