छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ में एक बार फिर माओवादियों की सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ हुई है, जिसमें दो महिला उग्रवादी समेत तीन माओवादी ढेर हो गए हैं. यह मुठभेड़ सुकमा जिले के बेहद घने और दुर्गम जंगलों में स्थित तुमलापाड़ के पहाड़ी क्षेत्र में हुई, जो भेज्जी और चिंतागुफा थाना क्षेत्रों की सीमा पर मौजूद है। यह इलाका लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का गढ़ माना जाता रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मुठभेड़ में मारे गए इन तीनों नक्सलियों पर कुल 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस और सुरक्षा बलों के अधिकारियों के अनुसार ये तीनों नक्सली संगठन के सक्रिय और वांछित सदस्य थे।
मडवी देवा, नक्सलियों की एरिया कमेटी मेंबर
इनमें सबसे बड़ा नाम मडवी देवा का था, जो नक्सलियों की एरिया कमेटी मेंबर के रूप में काम करता था और एक स्नाइपर विशेषज्ञ माना जाता था। जबकि दो महिला नक्सलियों में से एक सोधी गंगी थी, जो नक्सल संगठन की सक्रिय सदस्य थी और कई अवसरों पर सुरक्षा बलों पर हुए हमले की घटना में शामिल रही थी। एक अन्य महिला नक्सली पोडियम गंगी का नाम भी संगठन में काफी महत्वपूर्ण माना जाता था। वह नक्सलियों की चेतना-नाट्य मंडली की कमांडर थी। यह मंडली ग्रामीण इलाकों में नक्सल विचारधारा फैलाने, युवाओं को जोड़ने और प्रचार के काम में इस्तेमाल होती है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पोडियम गंगी कई वर्षों से इस मंडली का संचालन कर रही थी। वहीं मडवी देवा के बारे में सुरक्षा एजेंसियों के पास लंबे समय से जानकारी थी कि वह कई बड़े हमलों की योजना बनाने में शामिल रहा है।
मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद का खात्मा
आपको बता दें, इस साल अब तक छत्तीसगढ़ में मुठभेड़ों में 262 नकस्ली मारे जा चुके हैं। इनमें से 233 बस्तर संभाग में मारे गए, जबकी 27 अन्य गारियाबंद जिले में मारे गए, जो रायपुर संभागा में आता है। इससे पहले दुर्ग संभाग के मोहला- मानपुर , अंबागढ़ चौकी जिले में दो नकस्ली मारे गए थे। वहीं पिछले महीने, छत्तिसगढ़ में लगभग 300 नकस्ली मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति और 60 अन्य कार्यकर्ताओं ने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में हथियार डाल चुके हैं. केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी कई मौकों पर यह दोहरा चुके हैं कि मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद का खात्मा हो जाएगा.
दोनों ओर से कई घंटों तक रूक रूक कर गोलीबारी चलती रही
आपको बता दें, छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों को लगातार नक्सलियों की मौजूदगी और उनके खिलाफ सफलता मिल रही है। इसी आधार पर बीते दिनों सुकमा जिले में जिला पुलिस अधीक्षक(एसपी) किरण चव्हाण, रिजर्व गार्ड ( डीआरजी) और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जिसके बाद रविवार सुबह करीब आठ बजे सर्च ऑपरेशन के दौरान अचानक जंगलों में छिपे नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर गोलियां बरसा दीं। इसके बाद सुरक्षा बलों ने भी मोर्चा संभाला और दोनों ओर से कई घंटों तक रूक रूक कर गोलीबारी चलती रही। कई घंटों तक चली इस मुठभेड़ के बाद जब गोलियां थमीं, तो सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की तलाशी ली। तलाशी के दौरान उन्हें तीन नक्सलियों के शव मिले। इनमें एक पुरुष और दो महिलाएं शामिल थीं। बाद में पुलिस ने पुष्टि की, कि ये तीनों नक्सली संगठन के सक्रिय और वांछित सदस्य थे, जिन पर सरकार ने 5-5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।
मुठभेड़ स्थल से सुरक्षाबलों को भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद हुए हैं। पुलिस ने बताया कि मौके से 0.303 राइफल, एक बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (BGL), कई कारतूस, डेटोनेटर, विस्फोटक सामग्री और अन्य नक्सली सामान मिले हैं। BGL का मिलना इस बात को दिखाता है कि नक्सलियों के पास उस वक्त भी भारी हथियार मौजूद थे और वे बड़े हमलों की योजना बना सकते थे। इसके अलावा उनसे मिले बाकी हथिहार उपयोग के सामान से पता चलता है कि वे लंबे समय तक जंगलों में ही रहकर वारदात की तैयारी कर रहे थे। इन सब के बारामद होने से सुरक्षा बलों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि यह भविष्य में किसी बड़े हमले की आशंका को कम करता है।
पुलिस और सुरक्षा बलों के अधिकारी इसे बड़ी सफलता मान रहे हैं. उनके मुताबिक यह मुठभेड़ नक्सल संगठन के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि मारे गए तीनों सदस्य संगठन के महत्वपूर्ण सदस्य थे। उनके मारे जाने से इस क्षेत्र में नक्सलियों की गतिविधियों को बड़ा नुकसान पहुंचा है। पुलिस ने बताया कि इस घटना के बाद इलाके में सर्च ऑपरेशन और तेज कर दिया गया है, ताकि अन्य छिपे हुए नक्सलियों की तलाश की जा सके। जंगलों में पुलिस और सीआरपीएफ की अतिरिक्त टीमें भेजी गई हैं, जो आसपास के इलाकों में छिपे नक्सलियों के संभावित ठिकानों की जांच कर रही हैं।
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक यानी IG सुंदरराज पट्टिलिंगम ने कहा, कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है। माओवादी कार्यकर्ताओं के पास हिंसा छोड़कर सरकार की पुनर्वास नीति को अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। नक्सली चाहें तो वे सरकार की पुनर्वास नीति का फायदा उठाकर मुख्यधारा में लौट सकते हैं। सरकार ऐसे नक्सलियों को आर्थिक सहायता, रोजगार और सुरक्षित जीवन देने की योजना पहले से चला रही है। कई नक्सली जिन्हें पहले कठोर परिस्थितियों में रहना पड़ता था, अब आत्मसमर्पण कर शांतिपूर्ण जीवन बिता रहे हैं।
इसके अलावा बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण भी किया है. बीते महीने लगभग 300 नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण किया था जबकि महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में वरिष्ठ नक्सली भूपति समेत 60 माओवादी सरेंडर कर चुके हैं. केंद्रीय सरकार मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है.
सुकमा की यह बड़ी मुठभेड़ सुरक्षा बलों की हाल की सबसे बड़ी कामयाबियों में से एक मानी जा रही है। तीन इनामी नक्सलियों का मारा जाना न सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता है, बल्कि यह इस बात का संकेत भी है कि छत्तीसगढ़ के जंगलों में नक्सलवाद की पकड़ लगातार कमजोर पड़ती जा रही है। हालांकि अभी भी यह चुनौती पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा बलों ने भरोसा जताया है कि आने वाले महीनों में स्थिति और बेहतर होगी और इस क्षेत्र में शांति स्थापित होने की दिशा में बड़े कदम उठाए जाएंगे।


