न्यूज डेस्क: मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। लेबनान पर इजराइल के भीषण हमलों में एक ही दिन में सैकड़ों लोगों की जान चली गई, जबकि हजारों घायल हुए हैं। इस बीच सीजफायर को लेकर अंतरराष्ट्रीय विवाद गहराता जा रहा है। क्षेत्रीय हालात और जटिल हो गए हैं। लेबनान में इजराइल द्वारा किए गए ताजा हमलों में 254 लोगों की मौत हो गई, जबकि 1165 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में हताहतों के बाद देश में राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है। अस्पतालों में घायलों की भीड़ के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव बन गया है।
Highlights:
सरकार की अपील और कूटनीतिक प्रयास
लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कहा कि सरकार सभी राजनीतिक और कूटनीतिक संसाधनों का इस्तेमाल कर हमलों को रोकने की कोशिश कर रही है। वहीं स्वास्थ्य मंत्री रकान नासेरद्दीन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत मदद की अपील की है ताकि घायलों का बेहतर इलाज हो सके। सीजफायर को लेकर अलग-अलग देशों के बयान सामने आने से स्थिति और उलझ गई है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है। जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका ने ऐसा कोई वादा नहीं किया था।
ईरान का सख्त रुख और नई योजना
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर दबाव डालते हुए कहा कि उसे तय करना होगा कि वह युद्ध रोकना चाहता है या इजराइल का समर्थन जारी रखेगा। इसी बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल जहाजों पर प्रति बैरल 1 डॉलर टैक्स लगाने की योजना बनाई है। इस योजना के तहत जहाजों को अपने कार्गो की जानकारी पहले देनी होगी और भुगतान बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी में करना होगा। ईरान का कहना है कि यह कदम हथियारों की आवाजाही रोकने के लिए उठाया जा रहा है।
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अल-अक्सा मस्जिद फिर खुली, उमड़ी भीड़
यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद को 40 दिनों तक बंद रखने के बाद अब इजराइली प्रशासन ने पाबंदियां हटा दी हैं। गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में नमाजी मस्जिद पहुंचे और इबादत की। यह मस्जिद इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है और इस पर लगे प्रतिबंध को लेकर लंबे समय से क्षेत्र में तनाव बना हुआ था। पाबंदियां हटने के बाद माहौल में हलचल देखी जा रही है। लेबनान, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे मिडिल ईस्ट को अस्थिर बना दिया है। लगातार हमलों, कूटनीतिक टकराव और नई नीतियों के चलते हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस संकट पर बनी हुई है।
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