नई दिल्ली : कांग्रेस ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) के मार्किंग पोर्टल की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस पार्टी ने मंगलवार को एक्स हैंडल पर एक न्यूज़ चैनल का वीडियो शेयर करते हुए कहा कि हैकर ने एक टीवी चैनल सीबीएसई के मार्किंग पोर्टल को हैक किए जाने की बात कही. कांग्रेस ने एक्स पर लिखा,” सीबीएसई के मार्किंग पोर्टल से जुड़ी जो बातें सामने आ रही हैं, वे बहुत ही चिंताजनक हैं. निसर्ग नाम के हैकर ने एक टीवी चैनल पर कहा कि उसने सीबीएसई का मार्किंग पोर्टल हैक कर लिया था.”
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आगे लिखा, “हैकर के पास पोर्टल का मास्टर पासवर्ड था. वो टीचर्स को असाइन की गई कॉपी के नंबर तक बदल सकता था. सोचिए- जिस सिस्टम से छात्रों का भविष्य तय होता है, वो ही सुरक्षित नहीं है. ये छात्रों के साथ धोखा है.” कांग्रेस पार्टी ने लिखा, “सच यही है कि मोदी सरकार और उनके भ्रष्ट सिस्टम ने देश की शिक्षा व्यवस्था का मज़ाक बना दिया है.”
राहुल गांधी ने ये कहा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) परीक्षा परिणामों में ‘हेर-फे़र’ का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार और ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ नाम की कंपनी को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया है. हालांकि सीबीएसई ने राहुल गांधी के इन आरोपों को ख़ारिज किया है. सीबीएसई के मुताबिक़ राहुल गांधी के आरोप ग़लत, भ्रामक और तथ्यों पर आधारित नहीं हैं.
हाल ही में सीबीएसई में 12वीं कक्षा के छात्र वेदांत श्रीवास्तव की फिजिक्स आंसर शीट को लेकर खूब विवाद हुआ जिसकी चर्चा सोशल मीडिया पर भी हुई. वेदांत ने आरोप लगाया था कि री-इवैल्यूशन प्रोसेस के तहत उन्होंने जो स्कैन कॉपी डाउनलोड की वो उनकी नहीं किसी और की थी. बाद में सीबीएसई ने इस मामले में अपनी ग़लती मानते हुए बताया कि बताया कि वेदांत को उनकी सही आंसर शीट भेज दी गई है.
इसी का ज़िक्र करते हुए राहुल गांधी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “सीबीएसई परीक्षा परिणाम में भयंकर हेर-फेर हुई जिससे देश के लाखों बच्चे और उनके माता-पिता सदमे में हैं.” उन्होंने दावा किया कि ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ पहले ‘ग्लोबारिना’ के नाम से तेलंगाना में 2019 में विवादों में रही है. वहीं ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ की वेबसाइट के मुताबिक़ ये एक टेक और एग्ज़ाम टेक्नोलॉजी कंपनी है, जो सीबीएसई को परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराती है.
राहुल गांधी ने सवाल किया कि कंपनी को सीबीएसई का ठेका “क्यों और किसके कहने पर” दिया गया और क्या नियमों और प्रक्रिया को दरकिनार किया गया.


