Tuesday, July 28, 2026

सरायकेला-खरसावां के ईचागढ़ में जंगली हाथियों का कहर: मां-बेटी की मौत, तीन लोग गंभीर घायल

सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ थाना क्षेत्र में जंगली हाथियों के हमले ने एक परिवार को उजाड़ दिया। चांडिल वन विभाग रेंज के सोड़ो पंचायत स्थित हाड़ात गांन में शुक्रवार देर रात हाथियों के झुंड ने एक कच्चे मकान को तोड़ दिया। इस दर्दनाक घटना में मां और बेटी की मौत हो गई, जबकि परिवार के तीन अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पूरे गांव में भय और आक्रोश का माहौल है।

मां और बेटी की मौके पर मौत

हाथियों के हमले में चाइना देवी और उनकी बेटी अमिता कुमारी की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों को गंभीर चोटें आई थीं। वहीं कमलचंद महतो, मोहन महतो और सतुला देवी गंभीर रूप से घायल हो गए। घर से चीख-पुकार की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और मशाल जलाकर किसी तरह हाथियों को गांव से बाहर खदेड़ा। घटना के तुरंत बाद ग्रामीणों और प्रशासन की मदद से सभी घायलों को एमजीएम अस्पताल, जमशेदपुर भेजा गया। डॉक्टरों के अनुसार कमलचंद महतो की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। बाकी दो घायलों का इलाज चल रहा है।

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वन विभाग पर ग्रामीणों का आरोप

घटना के बाद हाड़ात गांव में डर का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से हाथियों का झुंड इलाके में घूम रहा है। पहले हाथी खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचा रहे थे, लेकिन अब लोगों के घरों पर हमला कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि शाम होते ही गांव में डर फैल जाता है। लोगों को हर समय यह भय सताता रहता है कि कब हाथी गांव में घुस आएं। ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

उनका कहना है कि विभाग सिर्फ मामूली मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। ग्रामीणों ने कहा कि दूसरे राज्यों की तुलना में झारखंड में हाथी हमलों के पीड़ितों को कम मुआवजा मिलता है। लोगों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो हाथी-मानव संघर्ष और भी खतरनाक हो सकता है।

वन विभाग ने दी सहायता राशि

घटना की सूचना मिलते ही चांडिल रेंजर और ईचागढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची। वन विभाग ने मृतकों के परिजनों को तत्काल 25-25 हजार रुपये की सहायता राशि दी है। इसके अलावा सरकारी प्रावधान के तहत मृतकों के परिवार को 4-4 लाख रुपये मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभाग ने घायलों के इलाज का पूरा खर्च उठाने की बात कही है। चांडिल रेंजर ने बताया कि हाथियों को वापस जंगल की ओर खदेड़ने के लिए टीम गठित की गई है। वन विभाग लगातार निगरानी कर रहा है ताकि गांवों में दोबारा कोई बड़ा हादसा न हो। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि जब तक दलमा क्षेत्र में हाथियों के लिए पानी और भोजन की स्थायी व्यवस्था नहीं की जाएगी, तब तक ऐसे हादसे रुकना मुश्किल है।

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