खूंटी : उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन एकदिवसीय झारखंड दौरे में सुबह 11 बजे पहुंचे खूंटी के उलिहातू गांव पहुंचे. भगवान बिरसा मुंडा की पावन जन्मस्थली पर स्थानीय लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उनका भव्य स्वागत किया. इस मौके पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश और राज्य सरकार के मंत्री डॉ इरफान अंसारी भी मौजूद रहे. इससे पहले उलीहातु पहुंचने पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को हैलीपैड पर गॉर्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया. यहां उपराष्ट्रपति स्थानीय ग्रामीणों विशेषकर बच्चों से भी मिलते नजर आए और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाई.
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उपराष्ट्रपति ने वंशज को किया सम्मानित
उपराष्ट्रपति ने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पूजा अर्चना कर उन्हें श्रद्दांजलि दी. इस दौरान उपराष्ट्रपति ने भगवान बिरसा मुंडा के वंशज सुखराम मुंडा को सम्मानित भी किया. बाद में उपराष्ट्रपति भगवान बिरसा मुंडा के वंशज के परिवार के बच्चों से भी मिले और उन्हें चॉकलेट भी दी. काफी देर तक उनसे बातें की. इस दौरान उपराष्ट्रपति ने वंशजों की कई समस्याओं को भी सुना. बाद में पूरे परिवार के साथ तस्वीरें भी खिंचवाई.
भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान पर गर्व
इस मौके पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक देशवासियों को भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान पर गर्व है. अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर उन्होंने एक पोस्ट में लिखा, ” जोहार झारखंड! भारत के उपराष्ट्रपति का पद संभालने के बाद, मैं एक बार फिर भगवान बिरसा मुंडा जी की पवित्र जन्मभूमि उलिहातु जाकर बहुत खुश हूँ। मैं इस महान स्वतंत्रता सेनानी को अपनी गहरी श्रद्धांजलि और दिल से श्रद्धांजलि देता हूँ, जिनका जीवन और बलिदान पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा। मुझे वह दिन बहुत अच्छे से याद है जब मैंने झारखंड के गवर्नर के तौर पर शपथ ली थी। उसी दिन, मैं उलिहातु गया था, एक ऐसा अनुभव जो बहुत मायने रखता है।
2021 में माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी द्वारा 15 नवंबर, भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने के दूरदर्शी फैसले ने हमारी आदिवासी विरासत के प्रति राष्ट्रीय जागरूकता और गर्व को बढ़ाया है। मुझे झारखंड के खूंटी में माननीय प्रधानमंत्री के साथ मौजूद रहने का भी सौभाग्य मिला, जब उन्होंने PM-JANMAN स्कीम की घोषणा की, जो विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समुदायों की रक्षा और उन्हें सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक बदलाव लाने वाली पहल है।
पीढ़ियों से आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों की समृद्ध विरासत और संघर्षों के बारे में गर्व और जागरूकता पैदा करने और साथ ही इस अमृत काल के दौरान आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने का यह दो-तरफ़ा तरीका, सही मायने में उन अधिकारों और सम्मान को पाने का प्रतीक है, जिनके लिए भगवान बिरसा मुंडा ने इतनी बहादुरी से लड़ाई लड़ी।”

