पलामू: झारखंड के पाटन थाना क्षेत्र के सिक्कीकला (मेराल) निवासी रामदास महतो के पुत्र अविनाश कुमार गौतम ने सोशिल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी समस्या साझा की। उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों पर गलत बिल भेजने और सुधार के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया। अविनाश ने अपने पोस्ट में बिजली मीटर की तस्वीर और सहायक अभियंता को दिए गए आवेदन की कॉपी भी साझा की। साथ ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को टैग कर मदद की गुहार लगाई। सोशल मीडिया पर युवक की पोस्ट सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने मामले पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
Highlights:
मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश
मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) के मुख्यालय और प्रबंध निदेशक को टैग कर तत्काल कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने कहा कि इस तरह की स्थिति बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मामले की जांच कर त्रुटि सुधारने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

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साथ ही पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी गई है। अविनाश कुमार ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के अधिकारी मीटर रीडिंग को नजरअंदाज कर गलत बिजली बिल जारी करते हैं। उन्होंने कहा कि बिल सुधारने के नाम पर अधिकारियों द्वारा 50 प्रतिशत तक रिश्वत मांगी जाती है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि विभागीय लापरवाही और भ्रष्टाचार से परेशान होकर वह मानसिक रूप से काफी परेशान हैं और आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
अविनाश के अनुसार उनकी दुकान का बिजली कनेक्शन उपभोक्ता संख्या P10639 के नाम से है। पहला बिजली बिल 15 दिसंबर 2021 को 1280 रुपये और दूसरा बिल 11 मार्च 2022 को 322 रुपये आया था, जिसे उन्होंने जमा कर दिया था। इसके बाद विभाग ने मीटर रीडिंग की अनदेखी करते हुए 21,128 रुपये का बिजली बिल जारी कर दिया। बिल में सुधार कराने के लिए उन्होंने 30 सितंबर 2024 को सहायक अभियंता को आवेदन दिया, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ।
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डाल्टनगंज विद्युत आपूर्ति प्रमंडल के कार्यपालक विद्युत अभियंता संतोष कुमार ने कहा कि मामले की जांच के लिए सहायक विद्युत अभियंता को भेजा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इस मामले के सामने आने के बाद बिजली विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और युवक की समस्या का समाधान कब तक होता है।


