राँची। झारखंड की राजधानी रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पुलिसिया व्यवस्था और इंसाफ के नाम पर होने वाले खेल को बेनकाब कर दिया है। धुर्वा के डीटी खटाल निवासी और पेशे से ड्राइवर प्रधान यादव ने पुलिस और दबंगों की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली है। इस खौफनाक कदम को उठाने से पहले प्रधान यादव ने 5 पन्नों का एक ऐसा सुसाइड नोट छोड़ा है, जिसने रांची पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची एसएसपी राकेश रंजन ने त्वरित और बड़ी कार्रवाई की है।
Highlights:
एसएसपी का बड़ा एक्शन: ASI और सहयोगी सस्पेंड, थाना प्रभारी को हटाने की अनुशंसा
घटना के बाद एक्शन मोड में आए एसएसपी राकेश रंजन ने तत्काल प्रभाव से केस के आईओ (अनुसंधान अधिकारी) जमादार लालमोहर पांडेय और उनके सहयोगी जितेंद्र टुडू को सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही, लापरवाही और शह देने के आरोप में धुर्वा थाना प्रभारी को भी निलंबित करने की अनुशंसा जोनल आईजी से कर दी गई है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए हटिया डीएसपी के नेतृत्व में एक हाई-लेवल जांच कमेटी का गठन किया गया है।
ये भी पढ़ें: झारखंड के अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने महाधिवक्ता रोहितश्य रॉय को सौंपा अपना इस्तीफा
सुसाइड नोट में बताया दर्द: थानेदार नहीं जज बनकर प्रताड़ित कर रहे थे जमादार साहब
मृतक प्रधान यादव ने मरने से पहले 5 पन्नों का सुसाइड नोट लिखा है, जो व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है। सुसाइड नोट के मुताबिक, असली विवाद 5 जून को शुरू हुआ था, जब पड़ोस के रहने वाले दबंग स्वर्गीय यादव के चार बेटों (धर्मेंद्र, जितेंद्र, जितेलेश और उनके भाई) ने मामूली कहासुनी के बाद प्रधान यादव के परिवार पर लाठी-डंडे, रॉड, तलवार और भाले से जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में प्रधान, उनकी पत्नी और उनके बुजुर्ग पिता खून से लथपथ हो गए।
सुसाइड नोट का सबसे झकझोर देने वाला अंश:
“जब हम लहूलुहान हालत में इंसाफ के लिए धुर्वा थाना पहुंचे, तो पुलिस ने आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय उल्टा हमें ही दोषी ठहराना शुरू कर दिया। एएसआई लालमोहर पांडेय पुलिस वाले नहीं, बल्कि जज की तरह कुर्सी पर बैठकर हमारे साथ अन्याय कर रहे थे। मैं कोई कानूनविद नहीं हूँ, इसलिए कानून की ज्यादा समझ नहीं थी। जब मैं बहुत ज्यादा तंग हो गया, तो टूटकर समझौते के लिए भी तैयार हो गया, लेकिन एएसआई लालमोहर पांडेय और जितेंद्र टुडू मुझे ही मुजरिम साबित करने पर तुले रहे।”- प्रधान यादव
चाय-होटल की आड़ में अवैध धंधा और पुलिस का प्रोटेक्शन
सुसाइड नोट में प्रधान यादव ने धुर्वा पुलिस और अपराधियों के बीच के गठजोड़ का भी पर्दाफाश किया है। नोट में साफ लिखा है कि हमला करने वाले आरोपी धुर्वा बस स्टैंड में चाय और खाने का होटल चलाते हैं, जिसकी आड़ में बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार होता है। इस अवैध कारोबार को धुर्वा पुलिस का पूरा संरक्षण प्राप्त है, यही वजह थी कि पुलिस पीड़ितों को ही प्रताड़ित कर रही थी।
14 जून को दिया गया था नोटिस, पर टूट गया भरोसा
हैरानी की बात यह है कि 14 जून को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) के तहत प्रधान यादव को अपना पक्ष रखने के लिए एक सप्ताह का नोटिस भी दिया गया था। लेकिन पुलिस के अमानवीय रवैये और दबंगों के खौफ के आगे बेबस प्रधान यादव का न्याय व्यवस्था से भरोसा उठ चुका था, और उन्होंने मौत को गले लगाना बेहतर समझा।
डीएसपी की रिपोर्ट के बाद होगी एफआईआर और गिरफ्तारी
एसएसपी राकेश रंजन ने साफ कहा है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। हटिया डीएसपी के नेतृत्व में बनी टीम बहुत जल्द अपनी जांच रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आरोपी पुलिसकर्मियों और प्रताड़ित करने वाले दबंग भाइयों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
इस घटना ने एक बार फिर रांची पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर रक्षक ही जब भक्षक बन जाएं, तो आम आदमी इंसाफ के लिए कहाँ जाए?
झारखंड की तमाम प्रशासनिक और आपराधिक खबरों की लाइव अपडेट के लिए जुड़े रहिए AIR NOW के साथ।
ये खबर भी देखें:




