हैदराबाद : तेलंगाना में हैदराबाद पुलिस ने मंगलवार देर रात तेलुगु न्यूज चैनल एनटीवी के तीन पत्रकारों को हिरासत में ले लिया। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई एक महिला आईएएस अधिकारी से जुड़े प्रसारण के कारण की गई है, जो कथित तौर पर मानहानि का कारण था। पुलिस के अनुसार, चैनल पर दिखाए गए एक अनौपचारिक कार्यक्रम में अधिकारी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली बातें कही गई थीं। इसके बाद सरकार ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल एसआईटी गठित करने का आदेश दिया। इसी आधार पर तीन पत्रकारों को हिरासत में लिया गया।
हालांकि, इस कार्रवाई ने मीडिया जगत में भारी नाराजगी पैदा कर दी। पत्रकार संगठनों और नागरिक समाज समूहों ने इसे प्रेस की आजादी पर हमला बताया। कई पत्रकारों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने गिरफ्तारी के दौरान जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया और पत्रकारों के साथ गलत व्यवहार किया। उनका कहना है कि सरकार आलोचनात्मक आवाजों को दबाने की कोशिश कर रही है। इस पूरे मामले पर हैदराबाद पुलिस कमिश्नर वी.सी. सज्जनार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि पुलिस ने कानून के तहत ही कार्रवाई की है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
1975 के आपातकाल से तुलना पर सज्जनार ने कहा, “अगर सच में आपातकाल होता, तो यहां मौजूद कई लोग जेल में होते।” उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी व्यक्ति, चाहे पत्रकार हो या आम नागरिक, कानून से ऊपर नहीं है। उनके मुताबिक, प्रसारण ने एक वरिष्ठ महिला अधिकारी की गरिमा को ठेस पहुंचाई है, इसलिए कार्रवाई जरूरी थी। फिलहाल यह मामला राजनीतिक और मीडिया जगत में बड़ी बहस का विषय बन गया है। एक तरफ पुलिस इसे कानूनी कार्रवाई बता रही है, वहीं दूसरी ओर पत्रकार इसे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला मान रहे हैं।


