Wednesday, July 22, 2026

नोएडा हिंसा मामले में तीन साजिशकर्ता की पहचान, दो गिरफ्तार और एक अभी भी फरार

नोएडा: नोएडा में हुए हिंसक प्रदर्शन के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि सुनियोजित तरीके से मजदूरों को भड़काकर हिंसा कराई गई। पुलिस ने तीन मुख्य साजिशकर्ताओं की पहचान की है, जिनमें से दो को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक आरोपी अब भी फरार है।

तीन मुख्य आरोपी, दो गिरफ्तार

पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले में रूपेश राय, मनीषा चौहान और आदित्य आनंद मुख्य साजिशकर्ता हैं। रूपेश राय और मनीषा चौहान को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि आदित्य आनंद अभी फरार है। तीनों आरोपी बिहार के रहने वाले हैं और घटना के समय नोएडा में मौजूद थे। जांच में ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ नाम के संगठन का नाम सामने आया है, जिसका प्रमुख रूपेश राय बताया जा रहा है। यह संगठन मजदूरों को संगठित कर उन्हें हिंसक प्रदर्शन के लिए उकसा रहा था।

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व्हाट्सएप ग्रुप और QR कोड से बनाई भीड़

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने 9 और 10 अप्रैल को व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर बड़ी संख्या में मजदूरों को जोड़ा। जगह-जगह QR कोड स्कैन कराकर लोगों को इन ग्रुप्स में शामिल किया गया। इन ग्रुप्स के जरिए सड़कों पर उतरने, आगजनी और तोड़फोड़ के लिए उकसाया गया। जांच के दौरान पुलिस को दो संदिग्ध X (ट्विटर) हैंडल (मीर इलियासी और आयुषी तिवारी) के बारे में जानकारी मिली। पुलिस के मुताबिक ये हैंडल पाकिस्तान से ऑपरेट किए जा रहे थे और पिछले तीन महीनों से सक्रिय थे। इन अकाउंट्स के जरिए फर्जी खबरें और मौत की झूठी सूचनाएं फैलाकर माहौल को भड़काया गया।

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VPN के जरिए छिपाई पहचान

सूत्रों के अनुसार, इन सोशल मीडिया अकाउंट्स को चलाने में वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का इस्तेमाल किया गया, ताकि असली लोकेशन छिपाई जा सके। पुलिस ने इनका बैक डेटा मंगवाकर जांच तेज कर दी है। 13 अप्रैल से वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर करीब 42 हजार कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। इस दौरान कई इलाकों में फैक्ट्रियों में पथराव, तोड़फोड़ और आगजनी हुई। 50 से ज्यादा गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। यह हिंसा लगातार दो दिन तक चलती रही।

पहले भी आंदोलनों में शामिल रहा आरोपी

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि ये आरोपी पहले दिल्ली में हुए CAA-NRC प्रदर्शनों के दौरान भी सक्रिय थे। इससे इनके नेटवर्क और गतिविधियों पर और संदेह गहरा गया है। मजदूरों का कहना था कि उन्हें न्यूनतम वेतन पर काम कराया जा रहा है। 10 से 12 हजार रुपये महीने की सैलरी में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। 12 घंटे काम के बावजूद ओवरटाइम नहीं दिया जाता, जिससे असंतोष बढ़ा।

सरकार ने बढ़ाई मजदूरी

हंगामे के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने का फैसला लिया है। न्यूनतम मजदूरी में करीब 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है, जो 1 अप्रैल से लागू होगी। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि फरार आरोपी आदित्य आनंद की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। साथ ही पूरे मामले में डिजिटल और वित्तीय एंगल से भी जांच जारी है।

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