Monday, April 20, 2026

तीन दिनों का संसद का विशेष सत्र हुआ शुरू, महिला आरक्षण कानून 2023 समेत तीन महत्वपूर्ण विधेयक होंगे पेश

नई दिल्ली : 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाले संसद का विशेष सत्र गुरूवार से शुरू हुआ. सुबह 11 बजे लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई. इस मौके पर सबसे पहले दिवंगत मशहूर गायिका आशा भोसले व लोकसभा के पूर्व सदस्यों के निधन पर शोक जताया. संसद के इस विशेष सत्र में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे. इनका उद्देश्य 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून- नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पूरी तरह लागू करना है. इसके अलावा दो और बिल हैं जिनमें परिसीमन विधेयक 2026 महत्वपूर्ण है.

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जिन तीन विधेयकों को संसद में पेश किया जाएगा, वो हैं :

1. केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण तय करना है.

2. संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 जनसंख्या की नई परिभाषा, बढ़ती आबादी के मद्देनजर संसद में सदस्यों की संख्या को बढ़ाना इसका मकसद.

3. परिसीमन विधेयक 2026 लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना है. सीटों का फिर से निर्धारण होगा.

सीएम स्टालिन ने जलाई परिसीमन बिल की प्रतियां

संसद में पेश होने वाले परिसीमन विधेयक के विरोध में तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन ने काला झंडा लहराया और बिल की प्रतियां भी जलाई. इधर डीएमके कार्यकर्ताओं ने तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के निर्देश पर पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन किया. इस मौके पर तमिलनाडु में “फासीवादी बीजेपी का घमंड चूर-चूर हो” यह नारे भी लगे.

इस मौके पर सीएम एमके स्टालिन ने कहा- आज मैंने एक बार फिर उस ‘काले कानून’ की प्रति जलाकर नई आग जलाई है, जो तमिलों को उनकी ही जमीन पर शरणार्थी बना देता है.यह आग अब पूरे द्रविड़ भूभाग में फैलेगी और बीजेपी के अहंकार को खत्म करेगी.उन्होंने कहा ‘तमिल हमारी मां है तमिल हमारी आत्मा की धधकती हुई चेतना है!’

इधर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि मुख्य मुद्दा आज महिलाओ को आरक्षण देना है. 33% रिजर्वेशन देने के बाद इतिहास हो जायेगा. बाकी मुद्दा उठाकर महिला आरक्षण को हानि पहुंचा रहे हैं. परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत में भ्रम फ़ैलाने का कोशिश  की जा रही है. ऐसा नहीं करना चाहिए.

बिल को लेकर विपक्ष की बैठक

दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्ष की अहम बैठक हुई. इसमें करीब 20 दलों के वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया. बैठक के बाद विपक्ष ने एकजुट रुख दिखाते हुए सरकार के तरीके पर गंभीर आपत्तियां जताईं. इस बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, UBT के संजय राउत, AAP के संजय सिंह, DMK के टी.आर. बालू, CPI की एनी राजा, IUML के ई.टी. मोहम्मद बशीर, के.सी. वेणुगोपाल और कपिल सिब्बल भी मौजूद रहे.

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव भी सहयोगियों के साथ पहुंचे. इसके अलावा टीएमसी सांसद सागरिका घोष, एनसीपी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले, निलोत्पल बसु और एन.के. प्रेमचंद्रन भी चर्चा में शामिल हुए. कुछ नेता वर्चुअली भी जुड़े. इनमें उद्धव ठाकरे, हेमंत सोरेन और दीपांकर भट्टाचार्य शामिल रहे. बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्ष का साझा रुख स्पष्ट किया.

अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया

महिला आरक्षण कानून 2023 में संशोधन से संबंधित 131वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि यह बीजेपी और उसके सहयोगियों के ताज़ा छल का एक “काला दस्तावेज़” है, जो दरअसल “चालाक लोगों की एक गुप्त योजना” है. इसके भीतर पिछड़े और दलित समाज की महिलाओं को स्थायी रूप से कमजोर करने की साजिश छिपी हुई है. उन्हें वास्तविक जनप्रतिनिधित्व से वंचित करने के लिए एक चक्रव्यूह रचा जा रहा है. यह विधेयक वर्चस्ववादी सोच रखने वालों की हार की हताशा और महिलाओं के प्रति उनके शोषणकारी-दमनकारी सामंती मानसिकता से जन्मा है. महिला आरक्षण विधेयक असल में एक “जनविरोधी दिखावा” भर है.

तीन बिलों की सूची जारी

मोदी सरकार ने लोकसभा में पेश करने के लिए तीन बिलों की सूची जारी की है. इनका मकसद 2029 तक महिलाओं के लिए आरक्षण कानून को लागू करना और लोकसभा की सदस्य संख्या को बढ़ाकर 850 तक करना है. केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पहले दो बिल पेश करेंगे, वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीसरा बिल पेश करेंगे. लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति ने इस चर्चा के लिए 18 घंटे का समय तय किया है. लोकसभा से पास होने के बाद राज्यसभा में इन बिलों पर चर्चा होगी. परिसीमन इस रणनीति का सबसे पेचीदा हिस्सा है.

बिल पास होते ही क्या बदल जाएगा

तीनों विधेयक पास होते हैं तो 2029 के आम चुनाव से ही महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू होने का रास्ता साफ हो सकता है. ये प्रस्ताव 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर आधारित हैं, जिसमें महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान था. सबसे बड़ा प्रस्ताव- लोकसभा की सीटों को बढ़ाना. अभी लोकसभा में 543 सीटें हैं, लेकिन सरकार चाहती है कि इन्हें बढ़ाकर अधिकतम 850 किया जाए, ताकि बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से प्रतिनिधित्व बेहतर हो सके.

दूसरा अहम प्रस्ताव- सरकार ने सुझाव दिया कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की एक-तिहाई (33%) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं, ताकि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ सके. हालांकि उस कानून को लागू करने की शर्त ये थी कि पहले नई जनगणना और उसके बाद परिसीमन हो. उस समय चिंता जताई गई थी कि ये आरक्षण लागू होने में काफी समय (शायद एक दशक या उससे ज्यादा) लग सकता है. अब नए विधेयकों के जरिए सरकार उस प्रक्रिया को तेज करना चाहती है, ताकि 2029 के आम चुनाव तक महिलाओं को आरक्षण मिल सके.

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