नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश समेत देश के 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे SIR के दौरान बीएलओ पर हो रहे हमलों और धमकियों को बेहद गंभीर मानते हुए चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। SIR से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि बीएलओ ग्राउंड लेवल पर भारी दबाव और तनाव में काम कर रहे हैं, उन्हें सुरक्षा मिलनी ही चाहिए।
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चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान बीएलओ के काम की कठिनाई को पूरी तरह स्वीकार किया। जस्टिस बागची ने कहा, “ये कोई डेस्क का काम नहीं है। वे हर घर जाते हैं, वहां जाकर वेरिफिकेशन करते हैं, फॉर्म भरवाते हैं, फिर उसे लेकर आते हैं और अपलोड करते हैं। घर-घर जाना, फिर वापस आकर अपलोड करना ये भारी दबाव और तनाव का काम है।” उन्होंने आगे कहा, “हम किसी राजनीतिक नैरेटिव में नहीं पड़ रहे हैं। हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि ग्राउंड लेवल पर SIR का काम बिना किसी रुकावट और डर के पूरा हो सके।”
बीएलओ की सुरक्षा का विषय गंभीर
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भी टिप्पणी की कि अगर बीएलओ को सुरक्षा नहीं दी जा रही है तो ये बहुत गंभीर विषय है। कोर्ट ने साफ किया कि मतदाता सूची को साफ-सुथरा और सही बनाना लोकतंत्र की बुनियाद है और इसके लिए काम करने वाले अफसरों को डर के साए में नहीं छोड़ा जा सकता है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा है कि आखिर बीएलओ की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर दो हफ्ते के अंदर जवाब मांगा है।
राजनीतिक दखल या हिंसा बर्दाश्त नहीं
कोर्ट ने कहा कि बीएलओ को सुरक्षित माहौल में काम करने का पूरा हक है, क्योंकि वे निष्पक्ष तरीके से मतदाता सूची तैयार करने का महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। कोर्ट का साफ कहना है कि इस काम में कोई राजनीतिक दखल या हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बता दें कि कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में बीएलओ घर-घर जाकर मतदाता सूची की जांच कर रहे हैं, लेकिन उन्हें स्थानीय गुंडों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं से लगातार धमकियां मिल रही हैं, कुछ जगह तो मारपीट भी हुई है।


