जम्मू : जम्मू में बना एकमात्र ऐसा रैन बसेरा है, जिसका शुल्क 100 रुपये निर्धारित होने से इस कड़ाके की ठंड में बेसहारा व गरीब लोगों की जिंदगी शहर की सड़कों पर सिसक रही है। जम्मू में बाहुफोर्ट के बोरिया क्षेत्र में एकमात्र रैन बसेरा है, जिसमें डारमेट्री हाल बने हुए हैं। यहां रहने के लिए हर रात का 100 रुपये शुल्क निर्धारित है। इसी कारण फुटपाथों पर सोने वाले गरीब और असहाय लोग इतने ठंड में भी रैन बसेरा का सहारा लेने से कतराते हैं, और मजबूरी में फुटपाथों पर ही सो जाते हैं।
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भवन जम्मू निगम की देखरेख में
सड़क के फुटपाथ पर रात में सो रहे लोगों के लिए प्रशासन या पुलिस द्वारा भी कोई ऐसा प्रभावी कदम नहीं उठाया जाता, जिसके तहत इन्हें फुटपाथों से उठाकर ऐसे स्थान पर रखा जाए। बढ़ती सर्दी के में कई ऐसे लोग हैं, जो फुटपाथों पर रात के समय सोए दिख जाते हैं। हालांकि यह लोग गरीब और इनका कोई सहारा नहीं है। ऐसे लोग अपना पेट भरने और परिवार चलाने के लिए छोटे-मोटे काम करते हैं, भीख मांग गुजारा करते हैं। ऐसे में जब जम्मू में कंपा देने वाली सर्दी पड़ रही है, तो रात के समय तो बाहर खड़ा होना भी मुश्किल लगता है।जम्मू रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, फ्लाईओवर के नीचे, गांधीनगर व कुछ सार्वजनिक स्थलों के आसपास कंबल ओढ़ के सो जाते हैं।
बढ़ती ठंड और रैन बसेरा का किराया को लेकर यह लोग प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। बता दें, बोरिया क्षेत्र में रैन बसेरा वर्ष 2018 में बना था। भवन निर्माण पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च हुए थे। जम्मू विकास प्राधिकरण ने इसका निर्माण किया था। बाद में इसे जम्मू नगर निगम को सौंप दिया गया। अब यह भवन जम्मू निगम की देखरेख में काम करता है। निगम के चार कर्मचारी यहां रहने वालों के लिए खाना बनाने के साथ-साथ भवन समेत अन्य कार्य देखते हैं।
फुटपाथ पर सर्दी से मौत हो जाती है
जम्मू में फुटपाथों पर सोने को मजबूर लोगों को सर्दी से बचाने के लिए आग जलाने की कोई व्यवस्था प्रशासन अथवा नगर निगम की तरफ से नहीं की जाती। अगर किसी की फुटपाथ पर सर्दी से मौत हो जाती है, तो पुलिस व प्रशासन सक्रिय होता है और फुटपाथों पर सोने वालों को कहीं और भगा दिया जाता है। उनमें से किसी को जम्मू के रैन बसेरा पहुंचा दिया जाता है। लेकिन कोई भी वहां रहना पसंद नहीं करता। इसका कारण साफ है कि रैन बसेरा के नियमों के तहत यहां रात गुजारने के लिए सौ रुपये देने पड़ते हैं। जो जम्मू जैसे शहर में ज्यादा हैं। निगम की मानें तो जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं को मद्देनजर ऐसे लोगों को संदिग्ध माना जाता है।


