रांची: रिम्स के जमीन अतिक्रमण मामले में झारखंड हाईकोर्ट में आज सुनवाई होगी. इस मामले में पिछले साल दिसंबर महीने के तीसरे हफ्ते में हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने रिम्स की जमीन से अतिक्रमण हटाने के साथ साथ मामले में एसीबी को वैसे अधिकारियों और लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया था, जिन अधिकारियों व सरकारी कर्मियों की मिलीभगत से अतिक्रमण हुआ था। झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने यह आदेश जारी किया था।
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हाईकोर्ट के निर्देश के लगभग दो हफ्ते से अधिक समय के बाद एसीबी ने इस मामले में सोमवार 5 जनवरी को प्राथमिकी दर्ज की है। संभावना जताई जा रही है कि हाईकोर्ट में आज होने वाली सुनवाई के चलते यह प्राथमिकी दर्ज की गई है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जिन लोगों के घर अतिक्रमण की वजह से तोड़े जा रहे हैं, उन्हें मुआवजा भी दिया जाए और इस मुआवजे को दोषी अधिकारियों और बिल्डरों से वसूला जाएगा. ऐसे में अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि एसीबी ने दर्ज प्राथमिकी में किन लोगों को आरोपी बनाया है।
बताया जा रहा है कि पूरा मामला रिम्स की सात एकड़ से अधिक अधिग्रहित जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़ा है. रिम्स के लिए यह जमीन 1964-65 में अधिग्रहीत हुई थी. झालसा की रिपोर्ट से सामने आया था कि इस जमीन पर मंदिर, दुकानें, पार्क और यहां तक कि मल्टीस्टोरी आवासीय इमारतें तक खड़ी हो गईं और उनमें फ्लैट्स बेचे भी गए. हाईकोर्ट ने पिछले साल दिसंबर महीने में इस रिपोर्ट के आने के बाद जिला प्रशासन को 72 घंटे के भीतर अतिक्रमण हटाने का सख्त निर्देश दिया था, जिसके बाद से जिला प्रशासन और नगर निगम की टीम ने अवैध अतिक्रमण को हटाते हुए रिम्स के लिए अधिग्रहित जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया।
खारिज की गई थी सभी याचिकाएं
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मामले में कई लोगों ने हस्तक्षेप याचिका करते हुए दावा किया था कि वे जमीन के असली मालिक हैं। उन्होंने 1932 की खतियान, 2019 की किराया रसीदें, बिक्री विलेख आदि दस्तावेज पेश किए थे। हालांकि, कोर्ट ने जांच में पाया कि यह जमीन 1963 के अधिसूचना और 1964-65 के भूमि अधिग्रहण मामले क्रमांक 76 के तहत अधिग्रहित की गई थी और मुआवजा राशि मूल भू-स्वामियों को दी जा चुकी है। इस आधार पर कोर्ट ने सभी हस्तक्षेप याचिकाएं खारिज कर दी थीं, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। कोर्ट ने राज्य सरकार को मामले में शामिल हर अधिकारी की जवाबदेही तय करने का भी निर्देश दिया था।


