रांची: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने शुक्रवार को तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच आपसी समन्वय पर सवाल खड़े किए. उन्होंने सवाल पूछा कि ‘क्या तीनों चुनाव आयुक्त आपस में बात भी करते हैं?’ उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “निश्चित तौर पर, हमें तो ऐसा नहीं लगता. 2025-26 के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) और उप चुनाव आयुक्त समेत क़रीब 50 अधिकारियों का तबादला हुआ, लेकिन उनकी एआरसी (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) अब भी लंबित हैं.”
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उन्होंने दावा किया, “नियम के मुताबिक़ मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों को एक पैनल के तौर पर मिलकर इन रिपोर्टों पर हस्ताक्षर करने होते हैं. लेकिन वे ऐसा नहीं कर पा रहे हैं. बताया जा रहा है कि प्रभावित अधिकारियों में से कुछ कई बार मुख्य चुनाव आयुक्त और दूसरे चुनाव आयुक्तों से अलग-अलग मिल चुके हैं और अपनी रिपोर्ट को मंजूरी दिलाने के लिए व्यक्तिगत रूप से अनुरोध कर चुके हैं.”
पवन खेड़ा ने लिखा, “लेकिन तीनों एक साथ बैठकर इन पर हस्ताक्षर नहीं कर पा रहे हैं या नहीं कर रहे हैं. इसलिए एआरसी अब भी लंबित हैं, यहां तक कि उन अधिकारियों की भी, जो काफ़ी समय पहले अन्य जगहों पर तैनात किए जा चुके हैं. अगर तीनों नियमित काग़ज़ी काम पर भी सहमत नहीं हो सकते, तो दुनिया के सबसे बड़े चुनाव के संचालन को लेकर हमें उन पर कितना भरोसा होना चाहिए?”
अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू की कई फ़ैसलों में असहमति रही है. विपक्ष का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार मनमाने तरीक़े से फ़ैसले ले रहे हैं और सत्ताधारी बीजेपी का कहना है कि असहमति ‘वाइब्रेंट लोकतंत्र’ में बहुत ही आम बात है.


