Friday, May 1, 2026

सूखे से निपटने के लिए सरकार ने कसी कमर, कृषि मंत्री ने अधिकारियों से 12 मई तक मांगी एक्शन प्लान

रांची : राज्य में संभावित कम वर्षा की स्थिति को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क और सक्रिय है। विभिन्न मौसम पूर्वानुमानों में वित्तीय वर्ष 2026–27 के दौरान औसत वर्षा में 30 से 35 प्रतिशत तक कमी की आशंका जताई गई है। इस गंभीर परिस्थिति को देखते हुए कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने विभागीय उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए हैं कि किसानों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

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कृषि मंत्री ने कहा कि यह चुनौती केवल किसी एक क्षेत्र या राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव देश के कई हिस्सों में देखने को मिल सकता है। विशेष रूप से मध्य भारत में सूखे जैसी स्थिति बनने की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में राज्य सरकार समय रहते ठोस रणनीति के साथ मैदान में उतर चुकी है। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि किसानों को समय पर जानकारी, तकनीकी मार्गदर्शन, अनुदान एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए आकस्मिक निधि की प्रभावी व्यवस्था की जाएगी।

कृषि मंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसी भी परिस्थिति में किसानों को असहाय नहीं छोड़ा जाएगा और हर संभव सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा। “हमारा लक्ष्य केवल संकट का सामना करना नहीं, बल्कि उसे अवसर में बदलते हुए खेती को अधिक मजबूत, टिकाऊ और लाभकारी बनाना है।” इसी दिशा में 12 मई को प्रस्तावित खरीफ कार्यशाला में जिला स्तरीय आकस्मिक योजना की एक व्यापक और क्रियान्वयन योग्य कार्ययोजना (ब्लूप्रिंट) प्रस्तुत की जाएगी।

किसानों को केवल धान पर निर्भर न रहने की सलाह देते हुए मंत्री ने कहा कि विशेषकर ऊँची भूमि क्षेत्रों में मड़ुआ (रागी), उड़द, मूंग, सोयाबीन जैसी कम पानी में होने वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही भूमि की प्रकृति के अनुसार धान की उपयुक्त किस्मों के चयन पर भी विशेष बल दिया गया है, ताकि कम वर्षा की स्थिति में भी उत्पादन प्रभावित न हो। बागवानी, चारा उत्पादन और बहुउद्देश्यीय खेती को भी प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे किसानों की आय के विविध स्रोत विकसित हो सकें। सूखे की संभावित स्थिति में मेड़ों पर सब्जी उत्पादन, अरहर की खेती और मिश्रित खेती (इंटरक्रॉपिंग) को प्रोत्साहित कर जोखिम को कम करने की रणनीति अपनाई जाएगी।

पशुपालन को किसानों की आय का मजबूत आधार बनाने पर भी सरकार विशेष ध्यान दे रही है। मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे विपरीत परिस्थितियों में भी अपने पशुधन को सुरक्षित रखें, क्योंकि यही कठिन समय में आय का सहारा बनता है। जल संरक्षण को इस पूरी योजना का आधार स्तंभ बनाते हुए चेक डैम निर्माण, जलाशयों में पानी का संरक्षण, ड्रिप इरिगेशन और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के व्यापक उपयोग पर जोर दिया गया है। सरकार इन तकनीकों को अपनाने के लिए किसानों को सब्सिडी और तकनीकी सहयोग उपलब्ध करा रही है।

कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी कारणवश खरीफ फसल प्रभावित होती है, तो रबी मौसम में दलहनी फसलों और मिलेट्स (श्री अन्न) को बढ़ावा देकर किसानों की आय सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने कहा, “हम चुनौती से घबराने वाले नहीं हैं। सरकार पूरी तैयारी, स्पष्ट रणनीति और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ किसानों के साथ खड़ी है। हमारा संकल्प है कि किसी भी परिस्थिति में किसानों का नुकसान न्यूनतम हो और उनकी आय सुरक्षित रहे।” बैठक में विभागीय सचिव अबूबकर सिद्दीकी, विशेष सचिव गोपाल जी तिवारी, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस.सी. दुबे, कृषि निदेशक भोर सिंह यादव सहित विभाग के सभी वरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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