नई दिल्ली: राजस्थान रॉयल्स के कप्तान और युवा स्टार बल्लेबाज रियान पराग एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। इस बार वजह उनका ड्रेसिंग रूम के भीतर वेपिंग (ई-सिगरेट पीना) करना है। इस गंभीर अनुशासनहीनता के लिए बीसीसीआई (BCCI) ने उन पर कड़ा एक्शन लेते हुए मैच फीस का 25% जुर्माना लगाया है।
Highlights:

कैमरे की नजर से नहीं बच सके पराग
यह घटना IPL 2026 के 40वें मुकाबले (राजस्थान रॉयल्स बनाम पंजाब किंग्स) के दौरान हुई। जब मैच की दूसरी पारी चल रही थी, तब लाइव ब्रॉडकास्ट के दौरान कैमरे की नजर ड्रेसिंग रूम पर पड़ी। वहां रियान पराग हाथ में ‘वेप’ लिए कश खींचते हुए कैद हो गए। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया और क्रिकेट प्रेमियों ने उनकी इस हरकत की जमकर आलोचना की।
मैच रेफरी ने पराग को पाया दोषी
शुरुआत में मैदानी अंपायरों, तन्मय श्रीवास्तव और नितिन मेनन ने इसकी रिपोर्ट नहीं की थी, लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद मैच रेफरी अमित शर्मा ने मामले का संज्ञान लिया। वीडियो की जांच की गई, जिसके बाद मैच रेफरी ने पराग को दोषी पाया और मैच फीस का 25% जुर्माना लगाया। इसके साथ ही पराग के अनुशासन रिकॉर्ड में 1 डिमेरिट पॉइंट जोड़ा गया।
IPL आचार संहिता के अनुच्छेद 2.21 के तहत पाया गया दोषी
रियान को IPL की आचार संहिता के अनुच्छेद 2.21 का उल्लंघन करते हुए पाया गया। जो ऐसे आचरण से संबंधित है जिससे खेल की बदनामी होती है। यह घटना दूसरी पारी के दौरान हुई, जब रियान को ड्रेसिंग रूम के अंदर वेप का इस्तेमाल करते हुए देखा गया।
ये खबर भी पढ़ें: जमशेदपुर में एयर एंबुलेंस के नाम पर वसूले 8 लाख, समय पर विमान न मिलने से मरीज की मौत
रियान ने मांगी माफी
रियान ने अपना अपराध स्विकार कर लिया है। साथ ही उन्होंने इसके लिए माफी भी मांग ली है और मैच रेफरी द्वारा दी गई सजा को मान लिया है।
क्या है IPL का अनुच्छेद 2.21?
आईपीएल की आचार संहिता का यह नियम एक अम्ब्रेला क्लॉज की तरह काम करता है। इसमें उन सभी हरकतों को शामिल किया जाता है जो खेल की गरिमा और प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाती हैं, भले ही वे विशिष्ट रूप से अन्य नियमों में न लिखी गई हों।
कानूनी पचड़े में भी फंस सकते हैं रियान?
सिर्फ बीसीसीआई ही नहीं, रियान के लिए भारत का कानून भी मुश्किलें खड़ी कर सकता है। भारत सरकार ने 2019 में ई-सिगरेट पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। कानून के अनुसार पहली बार अपराध करने पर दोषी को इसके उत्पादन, बिक्री या उपयोग पर एक साल की जेल या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
ये वीडिओ भी देखें:


