कोडरमा: झारखंड के कोडरमा जिले के सतगावां थाना क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार देर रात हाथियों के एक झुंड ने कटैया गांव में जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने कई घरों और पशु शेड को नुकसान पहुंचाया, वहीं दो पशुओं की भी मौत हो गई। घटना के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने शुक्रवार सुबह कटैया मोड़ पर सड़क जाम कर वन विभाग और जिला प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
Highlights:
मिट्टी का घर ढहाया
ग्रामीणों के अनुसार हाथियों के झुंड ने गांव में घुसकर सबसे ज्यादा नुकसान सर्जन प्रसाद यादव के घर में किया। हाथियों ने उनके मिट्टी के घर को पूरी तरह ढहा दिया। घर में बंधे भैंस के बच्चे को भी हाथियों ने मार डाला। इस घटना के बाद परिवार के लोग दहशत में हैं। हाथियों ने द्वारिक यादव के पशु शेड को भी तोड़ दिया। शेड गिरने से उसमें बंधा बकरी का बच्चा ईंटों के नीचे दब गया, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके अलावा हाथियों ने गांव के पंचायत भवन के गेट को भी नुकसान पहुंचाया।
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पहले भी जा चुकी है एक युवक की जान
ग्रामीणों ने बताया कि करीब 15 दिन पहले भी हाथियों के झुंड ने कटैया गांव में हमला किया था। उस दौरान एक युवक की जान चली गई थी। उस घटना के बाद भी ग्रामीणों ने कोडरमा-सतगावां मुख्य मार्ग जाम कर विरोध प्रदर्शन किया था। तब वन विभाग और प्रशासन के अधिकारियों ने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया था। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों ने हाथियों को इलाके से भगाने का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों का कहना है कि लगातार हो रहे हमलों के बावजूद वन विभाग स्थिति को गंभीरता से नहीं ले रहा है। इससे गांव के लोग डर और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर हैं।
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ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
कटैया मोड़ पर सड़क जाम होने के कारण इलाके में आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया। कई वाहन सड़क पर फंस गए और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलने के बाद थाना प्रभारी सौरभ कुमार शर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने जाम हटाया। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि अगर जल्द ही हाथियों को इलाके से नहीं हटाया गया और लोगों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो वे आगे और बड़ा आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने के लिए विशेष अभियान चलाए और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए।




