नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (एसआईआर) में छूटे हुए नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का एलान किया है. चुनाव आयोग की ओर से जारी बयान के अनुसार, विशेष अभियान के तहत कई कदम उठाने की घोषणा की गई है. निम्न निर्देश 1 अक्तूबर को सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ हुई बैठक के क्रम में जारी किए गए हैं.
Highlights:
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• बीएलओ मौजूदा मतदाता सूची का मिलान एसआईआर से पहले की सूची से करेंगे.
• जिन पात्र मतदाताओं के नाम मौजूदा सूची में नहीं हैं, उनकी सूची तैयार की जाएगी.
• बीएलओ घर-घर जाकर ऐसे मतदाताओं की मौजूदा स्थिति की जानकारी लेंगे और पात्र पाए जाने पर फ़ॉर्म 6 भरवाएंगे.
• बीएलओ को हर सप्ताह कम से कम 20-25 मतदाताओं तक पहुंचने का लक्ष्य दिया गया है. यह प्रक्रिया करीब एक महीने में पूरी करने को कहा गया है.
• अभियान में पहली बार और युवा मतदाताओं के नामांकन पर भी ध्यान दिया जाएगा.
• तैयार सूची और फ़ॉर्म 6 के आवेदन मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों के साथ साझा किए जाएंगे.
• बूथ स्तर पर विशेष कैंप लगाए जाएंगे. नाइट शेल्टर्स, मजदूर बस्तियों, बेघर और वंचित लोगों के लिए भी कैंप आयोजित किए जा सकेंगे.
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सोशल मीडिया पर आई प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे चुनाव आयोग का यूटर्न और इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर का परिणाम बताया है. वरिष्ठ पत्रकार सुहासिनी हैदर ने एक्स पर लिखा, “इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्टों को श्रेय जाता है, जिनके बाद चुनाव आयोग ने पूरी तरह यू टर्न लेते हुए अब मतदाताओं के नाम दोबारा सूची में शामिल करने की कोशिश शुरू की है. अब सवाल यह है कि पिछले एक साल से उन मतदाताओं के साथ हुए इस असंवेदनशील व्यवहार के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जा रहा है और ऐसी स्पष्ट रूप से त्रुटिपूर्ण मतदाता सूचियों के साथ हुए चुनावों का क्या मतलब है?”
चुनाव आयोग पर रिपोर्ट करने वाली इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार रितिका चोपड़ा ने एक्स पर लिखा, “जुलाई में फॉर्म 6 में जोड़ा गया एक अरिक्त सवाल अब केवल ‘एसआईआर चरण’ के दौरान लागू होगा. इसका क्या मतलब है? जिन 20 राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां छूटे हुए मतदाता और पहली बार मतदान करने वाले लोग सामान्य वैधानिक फ़ॉर्म 6 का इस्तेमाल करेंगे. इसमें उनके परिवार का पिछली एसआईआर सूची से संबंध पूछने वाला सवाल नहीं होगा.”


