न्यूज डेस्क : तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर लगातार राजनीतिक संकट बना हुआ है. थलपति विजय लगातार गठबंधन की कोशिश में जुटे हुए हैं. सत्ता के बेहद करीब पहुंचकर भी उससे दूर हो जा रहे हैं. शुरुआत में कांग्रेस और वाम दलों के समर्थन के संकेत मिले तो इससे टीवीके के सरकार गठन की उम्मीद बनी थी. लेकिन इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की ओर से डीएमके गठबंधन के प्रति अपनी निष्ठा दोहराने और वीसीके द्वारा अपना रुख स्पष्ट करने में देरी के बाद स्थिति फिर उलझ गई.
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सूत्रों के मुताबिक, सरकार गठन को लेकर चल रही बातचीत में मंत्रालयों और सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर जोरदार मोलभाव जारी है. बताया जा रहा है कि वीसीके ने डिप्टी सीएम पद मांगा है, जबकि टीवीके मंत्री पद से आगे जाने को तैयार नहीं थी. इसी बीच विधायकों के संपर्क से बाहर होने और एआईएडीएमके खेमे के साथ बैकचैनल बातचीत की खबरों ने राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी. संख्या पूरी तरह स्पष्ट नहीं होने के बावजूद विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया.
संकट उस समय और गहरा गया जब अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम ने शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि टीवीके ने उसके एकमात्र विधायक के समर्थन से जुड़ा फर्जी पत्र प्रसारित किया है. इस आरोप के बाद सहयोगी दलों के बीच अविश्वास बढ़ गया है और सरकार गठन का गणित और जटिल हो गया है.


