झारखंड : झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता के अपने पद से इस्तीफा देने की खबर राजधानी रांची के मीडिया में वायरल हो रही है, हालांकि इसकी पुष्टि आधिकारिक रूप से नहीं हुई है, लेकिन कहा जा रहा है कि उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे की वजह एक मामला में उनका नाम सामने को बताया जा रहा है.
बताया जा रहा है कि झारखंड के कुछ चर्चित मामलों में से एक हजारीबाग वन भूमि घोटाला में संलिप्त एक आरोपी से उनका वाट्सऐप चैट पिछले दिनों लीक हुआ था. इस मामले की जांच एसीबी कर रही है और जांच के दौरान ही जांच एजेंसी को कुछ ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिसके जांच की आंच डीजीपी तक पहुंच सकती है, ऐसे में इसके कारण सरकार की बदनामी न हो, इसके लिए डीजीपी पर इस्तीफे का दबाब होना बताया जा रहा है.
मीडिया में चर्चा यह भी है कि मंगलवार को वह सीएमओ भी पहुंचे थे और कुछ देर में वहां से निकलने के बाद वह पुलिस मुख्यालय स्थित अपने कार्यालय पहुंचे और वहां से अपने जरूरी कागजातों व अन्य सामानों को लेकर निकल गए। इसके बाद से ही मंगलवार शाम से उनके इस्तीफे की चर्चा मीडिया जगत में वायरल है, हालांकि इसकी पुष्टि किसी स्तर पर नहीं हुई है और न ही इस खबर का किसी स्तर पर कोई खंडन ही हुआ है. कुछ समाचार माध्यमों में इसे खबर भी बनाया गया है, लेकिन वह भी बिना किसी पुष्टि के.
बता दें कि अनुराग गुप्ता फरवरी 2025 में नियमित डीजीपी बने थे, इससे पहले वह झारखंड के प्रभारी डीजीपी थे. फरवरी महीने में डीजीपी नियुक्ति से संबंधित नई नियमावली के सरकार के स्तर पर बनाये जाने के बाद उन्हें दो साल के लिए डीजीपी बनाया गया था, ऐसे में उनका कार्यकाल फरवरी 2027 तक था. इस संबंध में जारी अधिसूचना में यह लिखा गया था कि उनका कार्यकाल ‘महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक, झारखंड (पुलिस बल प्रमुख) का चयन एवं नियुक्ति नियमावली 2025 के नियम 10(1) के अनुरूप होगा. इस नियमावली के अनुसार, डीजीपी का कार्यकाल 2 वर्ष का निर्धारित किया गया है.
अनुराग गुप्ता पहली बार 26 जुलाई 2024 को झारखंड के प्रभारी डीजीपी बने थे हालांकि विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें चुनाव आयोग ने पद से हटाकर अजय कुमार सिंह को डीजीपी बना दिया था, जो अनुराग गुप्ता से पहले झारखंड के डीजीपी रह चुके थे. विधानसभा चुनाव खत्म होते ही सत्ता में हेमंत सोरेन की वापसी हुई तो 28 नवंबर 2024 को डीजीपी पद पर भी अनुराग गुप्ता की वापसी हुई. इसके बाद नई नियुक्ति नियमावली के तहत 3 फरवरी 2025 को उन्हें नियमित डीजीपी बनाए जाने की अधिसूचना जारी की गई. 30 अप्रैल को उनके सेवानिवृत्त होने से कुछ दिन पहले झारखंड सरकार ने उन्हें एक्सटेंशन देने को लेकर केंद्र सरकार को पत्र भी लिखा, लेकिन इस पत्र पर केंद्रीय गृह मंत्रालय का कोई पदाधिकारी मौजूद नहीं था.


