Saturday, September 12, 2026

सुप्रीम कोर्ट का झारखंड सरकार को चेतावनी, सारंडा को Sanctuary घोषित करने में टालमटोल पर नाराजगी

रांची : सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार पर सारंडा क्षेत्र को वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र (Sanctuary) घोषित करने के मामले में नाराजगी जताई है। कोर्ट ने 29 अप्रैल 2025 को दिए गए आदेश का अनुपालन न करने पर झारखंड के मुख्य सचिव के खिलाफ Contempt Proceeding (अवमानना) नोटिस जारी किया है और उन्हें 8 अक्तूबर 2025 को सशरीर कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया है।

ऑनलाइन आदेश में टाइपिंग की गलती

सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी ऑनलाइन आदेश में गलती से झारखंड की जगह उत्तराखंड लिख दिया गया। आदेश के पहले बिंदु में यह टाइपिंग त्रुटि होने से ऐसा प्रतीत होता है कि कोर्ट ने टालमटोल नीति पर नाराजगी उत्तराखंड सरकार के प्रति जताई है। 17 सितंबर 2025 को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने झारखंड सरकार द्वारा टालमटोल नीति अपनाए जाने पर नाराजगी व्यक्त की थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेश का पालन न करना न्यायालय की अवमानना के समान है।

29 अप्रैल 2025 का आदेश और शपथ पत्र

29 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को निर्देश दिया था कि 57,519.41 हेक्टेयर क्षेत्र को Sanctuary घोषित करने के लिए WII (Wildlife Institute of India) को प्रस्ताव भेजा जाए। वन सचिव अबुबकर सिद्दीकी ने शपथ पत्र में यह जानकारी दी थी। WII की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार आगे की कार्रवाई करेगी।

17 सितंबर 2025 की सुनवाई में कोर्ट को यह जानकारी मिली कि झारखंड सरकार ने मुख्य सचिव के नेतृत्व में एक समिति का गठन कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे न्यायालय की अवमानना माना और मुख्य सचिव को 8 अक्तूबर को कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया।

19वें बिंदु में आदेश की व्याख्या में भ्रम

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के 19वें बिंदु में झारखंड के मुख्य सचिव की जगह उत्तराखंड के मुख्य सचिव का नाम टाइप हो गया। इस गलती के कारण आदेश ऐसा प्रतीत हुआ कि यदि 29 अप्रैल 2025 के आदेश का अनुपालन समय पर कर दिया जाता है, तो उत्तराखंड के मुख्य सचिव को कोर्ट में हाजिर होने से छूट मिल सकती है। हालांकि यह स्पष्ट रूप से टाइपिंग त्रुटि है, लेकिन इससे मीडिया और जनता में भ्रम पैदा हुआ।

सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी और चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि झारखंड सरकार द्वारा सारंडा को Sanctuary घोषित करने के मामले में टालमटोल नीति अपनाना न्यायालय की अवमानना के समान है। कोर्ट ने कहा कि यदि 29 अप्रैल 2025 के आदेश का अनुपालन नहीं किया गया, तो वह परम आदेश (Mandamus) जारी कर राज्य सरकार को Sanctuary घोषित करने के लिए बाध्य कर सकती है। यह संकेत भी दिया गया कि आदेश का पालन न होने पर और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सारंडा क्षेत्र का महत्व

सारंडा क्षेत्र झारखंड का एक महत्वपूर्ण वन्यजीव क्षेत्र है। यह क्षेत्र वन्य जीवों और जैव विविधता के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट की सक्रियता यह दर्शाती है कि सरकार को वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण के आदेशों का पालन करना अनिवार्य है। Sanctuary घोषित करने से क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

आगे की प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 8 अक्तूबर को झारखंड के मुख्य सचिव को कोर्ट में हाजिर होना अनिवार्य है। कोर्ट आदेश के अनुपालन की निगरानी भी करेगी। यदि सरकार ने निर्धारित समय में आदेश का पालन नहीं किया, तो कोर्ट और कठोर कदम उठा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट की यह कार्रवाई झारखंड सरकार के लिए स्पष्ट संदेश है कि सारंडा को Sanctuary घोषित करना सिर्फ टालने या स्थगित करने का विषय नहीं है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के मामलों में राज्य सरकार को जिम्मेदार और समयबद्ध कार्रवाई करनी होगी।

spot_img

एयर नाऊ स्पेशल

Big Breaking News: एक करोड़ का इनामी नक्सली मिशिर...

रांची: झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है. प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के सेंट्रल कमेटी सदस्य और...
- Advertisement -spot_img

सोशल मीडिया

25,000FansLike
40,000FollowersFollow
500FollowersFollow
113,000SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

ट्रेंडिंग ख़बर