नई दिल्ली: बिहार के आरा जिले के भोजपुर में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर वायरल फेसबुक लाइव और पुलिसिया दावों के बीच फंसे इस हाई-प्रोफाइल मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। हालांकि, देश की शीर्ष अदालत ने इस मामले की तुरंत सुनवाई करने से फिलहाल इनकार कर दिया है।
Highlights:
कानूनी मामलों की रिपोर्टिंग करने वाली वेबसाइट बार एंड बेंच के मुताबिक, सोमवार को जस्टिस नागरत्ना की बेंच में इस याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की गई थी। लेकिन कोर्ट ने याचिकाकर्ता वकील को निर्देश दिया कि वे इस मामले को पहले तय प्रक्रिया के तहत रजिस्ट्रार के सामने रखें।
जनहित याचिका में क्या हैं मुख्य मांगें?
सुप्रीम कोर्ट में दायर इस याचिका में बिहार पुलिस की थ्योरी को पूरी तरह चुनौती दी गई है। याचिका में मुख्य रूप से ये मांगें उठाई गई हैं:
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CBI जांच की मांग: पूरे एनकाउंटर मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए।
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पुलिसकर्मियों पर हत्या का केस: जिन पुलिसकर्मियों पर भरत भूषण तिवारी की ‘हत्या’ का आरोप है, उनके खिलाफ तुरंत नामजद केस दर्ज किया जाए।
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पूर्व जज की अध्यक्षता में कमेटी: मामले की स्वतंत्र जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन हो, जिसकी कमान सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश के हाथों में हो।
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एक दिन पहले मानसिक अस्वस्थ, अगले दिन एनकाउंटर: क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा मामला 17 जून का है, जब भोजपुर पुलिस ने शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के रहने वाले 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी को एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया था। लेकिन इस एनकाउंटर क्रोनोलॉजी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं:
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पुलिस की प्रेस रिलीज: एनकाउंटर से ठीक एक दिन पहले पुलिस ने भरत भूषण को मानसिक रूप से अस्वस्थ (विक्षिप्त) बताया था।
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आत्मरक्षा का दावा: घटना के बाद भोजपुर एसपी की ओर से जारी बयान में कहा गया, कि “पुलिस टीम ने खुद की और आम लोगों की सुरक्षा के लिए गोली चलाई, जो भरत भूषण के पैर में लगी।” बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
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फेसबुक लाइव ने पलटी कहानी: पुलिस के इस दावे के उलट, गोली लगने से ठीक पहले भरत भूषण तिवारी ने अपने फेसबुक अकाउंट से एक लाइव वीडियो किया था। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में साफ दिख रहा है कि भरत भूषण ने अपनी पिस्टल पुलिस की तरफ फेंक दी थी और वे सरेंडर करने की बात कह रहे थे। इसी वीडियो के आधार पर परिजन और स्थानीय ग्रामीण इसे सोची-समझी साजिश और फर्जी एनकाउंटर करार दे रहे हैं।
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राजनीति और जमीन पर भारी आक्रोश
स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार और बाढ़ प्रभावितों के हक के लिए आवाज उठाने वाले भरत भूषण की मौत के बाद भोजपुर से लेकर पटना तक का सियासी और सामाजिक पारा चढ़ गया है। ग्रामीणों ने आरा-बक्सर फोरलेन को जाम कर भारी हंगामा भी किया था। हालांकि बढ़ते विवाद को देखते हुए राज्य सरकार ने इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन अब हर किसी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से हरी झंडी मिलने के बाद इस याचिका पर क्या रुख अपनाता है।
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