नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों आरोपी एक साल तक दोबारा जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकेंगे। हालांकि, इसी मामले में शामिल 5 अन्य आरोपियों को 12 सख्त शर्तों के साथ जमानत दे दी गई है।
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मामला क्या है?
यह मामला फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों से जुड़ा है। उस समय नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा भड़क उठी थी। इन दंगों में 53 लोगों की मौत, 250 से अधिक लोग घायल हुए थे और 750 से ज्यादा FIR दर्ज की गई थीं। दिल्ली पुलिस का आरोप है कि ये दंगे अचानक नहीं हुए, बल्कि पहले से रची गई साजिश के तहत भड़काए गए।
आरोपी कब से जेल में हैं?
इस केस में उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद पिछले 5 साल 3 महीने से तिहाड़ जेल में बंद हैं। शरजील इमाम को दंगों से करीब छह हफ्ते पहले 28 जनवरी 2020 को गिरफ्तार किया गया था। उमर खालिद को 13 सितंबर 2020 को हिरासत में लिया गया था। इन सभी पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) बहुत महत्वपूर्ण है और ट्रायल से पहले जेल को सजा नहीं माना जा सकता। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि UAPA एक विशेष कानून है, जिसमें जमानत के लिए अलग और सख्त शर्तें तय की गई हैं। कोर्ट के अनुसार, राज्य की सुरक्षा और अखंडता से जुड़े मामलों में केवल देरी को जमानत का आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने कहा कि हर आरोपी की भूमिका अलग होती है, इसलिए जमानत पर फैसला करते समय हर केस का अलग-अलग मूल्यांकन जरूरी है। इसी आधार पर कुछ आरोपियों को जमानत दी गई, जबकि उमर खालिद और शरजील इमाम को राहत नहीं मिली।
हाईकोर्ट का पुराना आदेश
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने 2 सितंबर 2025 को सभी आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। हाईकोर्ट ने कहा था कि उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका पहली नजर में गंभीर लगती है और उन पर भड़काऊ भाषण देकर भीड़ को उकसाने के आरोप हैं। दिल्ली पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि उमर और शरजील दंगों के मुख्य साजिशकर्ता हैं। पुलिस का दावा है कि दंगों की योजना तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा के दौरान बनाई गई थी, ताकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान भारत की ओर खींचा जा सके। पुलिस ने यह भी कहा कि सुनवाई में देरी के लिए आरोपी खुद जिम्मेदार हैं और अगर सहयोग करें तो ट्रायल दो साल में पूरा हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से साफ है कि UAPA जैसे मामलों में जमानत आसान नहीं है। जहां एक ओर कुछ आरोपियों को राहत मिली, वहीं उमर खालिद और शरजील इमाम को अभी लंबा इंतजार करना होगा। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि मामले की सुनवाई तेज की जाए, ताकि न्याय समय पर हो सके।


