नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र में लोकसभा में मंगलवार इलेक्शन रिफ़ॉर्म्स यानी चुनाव सुधार पर चर्चा हो रही है. इसकी शुरुआत कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने की. मनीष तिवारी ने अपने भाषण में निर्वाचन आयुक्त के चुनाव की प्रक्रिया में सुधार की मांग की. इसके साथ ही उन्होंने निर्वाचन आयोग की ओर से कराए जाए वाले एसआईआर को ‘ग़ैर-क़ानूनी’ बताया.
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चर्चा के दौरान राजीव गांधी का जिक्र
उन्होंने निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम पर भी सवाल उठाए. इसके अलावा उन्होंने वीवीपैट से चुनाव कराए जाने की मांग की. कांग्रेस सांसद ने ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ के मुद्दे पर भी बात की. मनीष तिवारी ने कहा, “पिछले 78 साल में अगर सबसे बड़ा चुनाव सुधार हुआ तो वो भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी ने किया, जब उन्होंने मतदान की आयु सीमा 21 से घटाकर 18 किया और करोड़ों भारतीय नौजवानों को मतदान का अधिकार दिया.”
चयन कमेटी को लेकर मनीष तिवारी ने कहा
मनीष तिवारी ने कहा कि देश के 12 राज्यों में किया जा रहा SIR गैरकानूनी है। संविधान में पूरे राज्य में एक साथ SIR को लेकर कोई कानून नहीं है, इसे तत्काल रोकें। आगे मनीष तिवारी ने कहा कि देश में चुनावों से पहले डायरेक्ट केस ट्रांसफर करने पर रोक लगनी चाहिए, चुनाव EVM की जगह बेलट पैपर से कराए जाने चाहिए। साथ ही चुनाव आयुक्त के चयन करने वाली कमेटी में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को शामिल करना चाहिए।
अखिलेश यादव ने की NRC की चर्चा
लोकसभा में चुनाव सुधारों और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर हो रही चर्चा के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार और चुनाव आयोग मिलकर SIR के बहाने अंदर ही अंदर NRC वाला काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, यूपी के सीएम कह रहे हैं कि हम डिटेंसन सेंटर बना रहे हैं। जो ये खुलकर नहीं कर सकते हैं वो SIR के बहाने कर रहे हैं।
आपको बता दें कि एक दिसंबर से शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र में शुरूआत से ही विपक्ष SIR और वोट चोरी पर चर्चा की मांग कर रहा है। सत्र के पहले और दूसरे दिन यानी 1-2 दिसंबर को विपक्ष ने चर्चा कराने को लेकर हंगामा किया था। इसके बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 2 दिसंबर को सरकार और विपक्ष के नेताओं को मुलाकात के लिए बुलाया था। जहां सरकार और विपक्ष ने 9 दिसंबर को लोकसभा में 10 घंटे चर्चा को लेकर सहमति जताई थी।


