झारखंड : झारखंड में सहायक शिक्षक (assistant teacher) पदों के लिए चयन प्रक्रिया के दौरान दो वर्षीय B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन) कोर्स धारकों की स्वीकार्यता को लेकर विवाद चल रहा था। ऐसे कई अभ्यर्थियों ने अपनी उम्मीदवारी दाखिल की थी, जिन्हें कहा गया कि उन्हें बुक नहीं माना जाएगा क्योंकि विज्ञापन में 1 वर्ष B.Ed को मान्यता दी गई थी। इस विवाद पर हाई कोर्ट ने अब हस्तक्षेप किया है और इस आदेश पर रोक लगा दी है।
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हाई कोर्ट ने क्या कहा
कोर्ट ने यह निर्देश दिया है कि झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (JSSC) उन अभ्यर्थियों के आवेदन स्वीकार करे, जिनके पास दो वर्षीय B.Ed कोर्स है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने कहा है कि सिर्फ इसलिए आवेदन अस्वीकार करना नहीं चाहिए कि विज्ञापन में एक वर्ष B.Ed को मान्यता दी गई हो। इस फैसले से उन अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी, जिन्हें अब तक उनकी योग्यता को लेकर बाहर रखा गया था।
मामला कैसे उठा
मामला एक अभ्यर्थी राजकुमारी सिंह की याचिका से शुरू हुआ। उन्होंने दावा किया कि उनके पास 2 वर्षीय B.Ed की डिग्री है लेकिन JSSC ने उनका आवेदन इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि विज्ञापन में केवल 1 वर्ष B.Ed को स्वीकार्य बताया गया था। कोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से देखा और कहा कि यदि विज्ञापन ने सिर्फ 1 वर्ष को बताया है, तो भी दो वर्षीय पाठ्यक्रम वालों को पूरी तरह बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।
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शिक्षा व्यवस्था और योग्यता विवाद
यह विवाद शिक्षा व्यवस्था में योग्यता की मांगों और नियमों की सख्ती को लेकर भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। पहले सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अनिवार्य योग्यता D.El.Ed (डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन) होनी चाहिए, और B.Ed को प्राथमिक शिक्षक की योग्यता नहीं माना जाना चाहिए। यह निर्णय कई राज्यों में शिक्षा प्रणाली और भर्ती नियमों की पुनर्समीक्षा का आधार बन चुका है।
इस फैसले का महत्व
दो वर्षीय B.Ed कोर्स धारकों को राहत: जिन उम्मीदवारों को अभी तक उनकी योग्यता के कारण बाहर रखा गया था, उन्हें अब मौका मिलेगा। भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और न्याय: कोर्ट ने यह संकेत दिया है कि भर्ती विज्ञापनों में सख्ती नहीं इतनी होनी चाहिए कि योग्य उम्मीदवारों को बाहर किया जाए। राज्य स्तर पर शिक्षा नीति पर असर: इस फैसले से शिक्षा विभागों को भर्ती नियमों और विज्ञापनों की समीक्षा करनी पड़ सकती है।
अब आगे क्या होगा?
JSSC को निर्देश मिल चुका है कि वे उन उपयोगी अभ्यर्थियों के आवेदन स्वीकार करें। उन उम्मीदवारों को मौका दिया जाएगा जिन्हें पहले खारिज किया गया था। भर्ती प्रक्रिया में सुधार और विज्ञापनों में स्पष्टता लाने की जिम्मेदारी सरकार और शिक्षा विभाग पर होगी।


