झारखंड : झारखंड की राजधानी रांची के निवासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है. रांची अब बड़े मेट्रो शहरों की कतार में शामिल होने जा रहा है, जहां बिना किसी रुकावट के 24 घंटे बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी. रांची में 24 घंटे बिजली आपूर्ती करने के लिए 1500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. झारखंड सरकार ने आरडीएसएस यानी पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना के दूसरे चरण को मंजूरी देने की तैयारी कर ली है. इस योजना के तहत अकेले रांची एरिया बोर्ड में 1500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसका मुख्य लक्ष्य बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण करना और उपभोक्ताओं को बिना रुके बिजली होगा.
आरडीएसएस, यह केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसमें खर्च होने वाली कुल राशि का 60 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करती है, जबकि 40 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार ग्रांट यानी अनुदान के रूप में देती है. इस योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य बिजली की चोरी रोकना, तकनीकी खराबी के कारण होने वाले ‘पावर लॉस’ को कम करना और वितरण प्रणाली को इतना मजबूत बनाना है कि उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली मिल सके. जानकारी के अनुसार, इस योजना का पहला चरण चल रहा है, जिसे मई 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. पहले चरण में मुख्य रूप से एलटी और एचटी लाइनों की लंबाई बढ़ाई गई है और नए ट्रांसफार्मर लगाए जा रहे हैं. जबकि दूसरे चरण के लिए रांची एरिया बोर्ड ने मुख्यालय को प्रस्ताव भेज दिया गया है, जिसकी स्वीकृति मिलते ही इसी साल काम शुरू हो जाएगा. सरकार की इस योजना को दो बड़े हिस्सों में बांटा गया है, जिससे बिजली की गुणवत्ता और आपूर्ति दोनों में सुधार होगा.
पहला लोकल फॉल्ट से मुक्ति, यानी इसमें मोहल्लों में ट्रांसफार्मरों की संख्या बढ़ाई जाएगी. दूसरा लाइन लॉस में कमी, जिसके तहत बिजली के तारों की दूरी को व्यवस्थित किया जाएगा ताकि बिजली लंबी दूरी तय करते समय बर्बाद न हो. तीसरा स्मार्ट मीटरिंग, इसमें बिजली चोरी रोकने के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जाएगे, जिससे ईमानदारी से बिजली का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को बेहतर वोल्टेज मिलेगा. वहीं, दूसरे चरण में अंडरग्राउंड केबलिंग की जाएगी. जिससे भीड़भाड़ वाले इलाकों में जहां तार खुले हैं, वहां 11 KV और 33 KV की लाइनों को जमीन के अंदर किया जा सके. गैस इंसुलेटेड सब-स्टेशन, इसमें आधुनिक तकनीक वाले नए ग्रिड और सब-स्टेशन बनाए जाएंगे जो कम जगह घेरते हैं और बहुत सुरक्षित होते हैं. मजबूत आईटी सेल. अगर बिजली कटती है या कोई शिकायत होती है, तो ‘आईटी सेल’ के मजबूत होने से फॉल्ट का पता तुरंत चल सके और उसका समाधान भी तेजी से हो. और दूसरे फेज में फीडर एकाउंटिंग की जाएगी . जिससे अब फीडर से लेकर उपभोक्ता के घर तक पहुंचने वाली हर यूनिट बिजली का हिसाब रखा जा सके.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह सिर्फ रांची ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड में बिजली व्यवस्था को सुधारने के लिए लगभग 10 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने की संभावना है. व्यवसायिक दृष्टिकोण से भी यह एक बड़ा बदलाव होगा. उद्योगों और छोटे व्यापारियों को बिजली की बर्बादी और वोल्टेज की समस्या से निजात मिलेगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. हालांकि 1500 करोड़ का यह निवेश रांची को एक “पावर सरप्लस” शहर बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है. रांची एरिया बोर्ड द्वारा भेजा गया प्रस्ताव राज्य और केंद्र के बीच समन्वय का एक बेहतरीन उदाहरण है. जैसे ही इस साल दूसरे चरण का काम शुरू होगा, रांची के लोगों का 24 घंटे बिजली मिलेगी. और बार -बार लाइट कट होने की दिक्कत से निजात मिलेगी.


