खेल डेस्क: अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर लियोनेल मेसी ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास की घोषणा कर दी, जिसके बाद दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों में मायूसी छा गई। 39 वर्षीय मेसी ने एक भावुक पत्र साझा करते हुए अर्जेंटीना की राष्ट्रीय टीम के साथ अपने लंबे और यादगार सफर को अलविदा कहा।
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मेसी ने अपने संदेश में बताया कि उन्होंने यह फैसला 2026 विश्व कप फाइनल के दो दिन बाद, 21 जुलाई को ही लिख लिया था। अर्जेंटीना को विश्व कप फाइनल में स्पेन के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि, मेसी ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर को अलविदा कहा है, वह क्लब फुटबॉल खेलना जारी रखेंगे।
मेसी के रिटायरमेंट पर चर्चा में धोनी
वहीं, मेसी के संन्यास के बाद सोशल मीडिया पर उनके करियर की तुलना भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और रांची के राजकुमार महेंद्र सिंह धोनी से भी की जा रही है। खास बात यह है कि धोनी ने भी 39 वर्ष की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया था।
दोनों दिग्गजों के करियर में कई दिलचस्प समानताएं देखने को मिलती हैं। धोनी ने अपने शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर में क्रिकेट के सभी बड़े खिताब अपने नाम किए, वहीं मेसी ने भी अपने करियर में विश्व कप, कोपा अमेरिका समेत फुटबॉल के सभी बड़े खिताब हासिल किए।
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फीफा ने बताया था “थाला”
मेसी के लिए भारतीय प्रशंसकों के बीच “थाला” शब्द की चर्चा भी पहले खूब हुई थी। 2026 विश्व कप के दौरान फीफा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर मेसी की एक तस्वीर के साथ “THALA” लिखे जाने के बाद भारतीय क्रिकेट और धोनी प्रशंसकों ने इसे जमकर साझा किया था। दोनों के शांत स्वभाव और कुशल नेतृत्व के कारण भी लगातार उनकी तुलना की जाती है।
अब मेसी के अंतरराष्ट्रीय संन्यास के बाद धोनी से उनकी तुलना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। दोनों खिलाड़ियों ने अपने-अपने खेल में न केवल असाधारण सफलता हासिल की, बल्कि करोड़ों प्रशंसकों के दिलों में भी एक खास जगह बनाई।
फुटबॉल के दिग्गज मेसी
अपने विदाई संदेश में मेसी ने कहा कि यह फैसला उनके लिए बेहद मुश्किल है। उन्होंने लिखा कि उन्होंने अर्जेंटीना की जर्सी के लिए हमेशा अपना सबकुछ दिया और अब उन्हें लगता है कि नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए आगे आने का समय आ गया है।
गौरतलब है कि मेसी ने अर्जेंटीना के लिए अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में एक लंबी और ऐतिहासिक यात्रा तय की। 2022 में विश्व कप जीतना उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। अब उनके अंतरराष्ट्रीय संन्यास के साथ अर्जेंटीना फुटबॉल के एक ऐतिहासिक अध्याय का अंत हो गया है।

