रांची: झारखंड में महिला पर्यवेक्षिका नियुक्ति से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने चयन प्रक्रिया और विश्वविद्यालय से जारी डिग्रियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग में महिला पर्यवेक्षिका पद के लिए सफल 33 अभ्यर्थियों की डिग्रियां अब जांच के घेरे में हैं। खास बात यह है कि इन सभी 33 अभ्यर्थियों ने झारखंड के रामगढ़ जिला स्थित राधा गोविंद विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की है।
Highlights:
इसे भी पढ़ें : हल्दिया से नेपाल जा रहा था रिफाइन तेल लदा टैंकर ब्रेक फेल होने से मेघातरी घाटी में पलटा, ग्रामीणों ने लूट लिया
मान्यता खत्म करने की अनुशंसा
बताया जा रहा है कि नियुक्ति प्रक्रिया में चयन के बाद जब सफल अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्रों की जांच की गई तो इस दौरान कई गंभीर विसंगतियां सामने आने के बाद झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय के खिलाफ उचित कार्रवाई के लिए UGC यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को रिपोर्ट भेजकर विश्वविद्यालय की मान्यता खत्म करने की अनुशंसा की है। जांच कमेटी ने आशंका जताई है कि महिला पर्यवेक्षिका पद के लिए सफल 33 अभ्यर्थियों को बिना फीस की रसीद, नियमित कक्षा में उपस्थिति और आंतरिक मूल्यांकन जैसे जरूरी रिकॉर्ड के बैकडेट में डिग्री जारी की गई है। हालांकि, यह फिलहाल जांच कमेटी की आशंका है। इसका अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
33 सफल अभ्यर्थियों के डिग्री संदिग्ध
जांच के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन से इन 33 अभ्यर्थियों से जुड़े कई जरूरी शैक्षणिक रिकॉर्ड मांगे गए। इनमें फीस की रसीद, दैनिक कक्षा उपस्थिति और आंतरिक मूल्यांकन से जुड़े दस्तावेज शामिल थे। लेकिन कमेटी के मुताबिक, विश्वविद्यालय प्रशासन इन रिकॉर्ड को उपलब्ध कराने में कठिनाई का सामना करता रहा। इतना ही नहीं, परीक्षा की उपस्थिति शीट में भी कई विसंगतियां सामने आई हैं। अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं के सीरियल नंबर में कई जगह ओवरराइटिंग मिली है।
तिथियों में फेरबदल
वहीं, एक मामले में 25 अभ्यर्थियों की उपस्थिति दर्ज थी, लेकिन शीट पर सिर्फ 24 हस्ताक्षर मिले। अब बात करते हैं डिग्री और प्रोविजनल सर्टिफिकेट की तारीखों की। जांच में सामने आया कि अधिकांश अभ्यर्थियों की अंतिम डिग्री पर जारी करने की तारीख 15 मई 2025 दर्ज है। जबकि विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह इससे पहले यानी 9 मार्च 2025 को आयोजित हो चुका था।
इसके अलावा कुछ मामलों में प्रोविजनल सर्टिफिकेट की तारीख अंतिम डिग्री प्रमाण-पत्र जारी होने के बाद की बताई गई है। जांच कमेटी ने तारीखों के इस अंतर को भी गंभीर विसंगति माना है। जांच में एक और बात सामने आई है, जिस पर सवाल उठ रहे हैं। सभी 33 अभ्यर्थियों ने 12वीं यानी इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के करीब 6 से 13 साल बाद विश्वविद्यालय में नामांकन लिया था। कमेटी ने इतने लंबे अंतर को भी असामान्य पैटर्न माना है।
एक ही समय में नामांकन कैसे
इसके साथ ही जांच कमेटी ने यह भी सवाल उठाया है कि अलग-अलग पृष्ठभूमि से आने वाले इन 33 अभ्यर्थियों ने लगभग एक ही अवधि में एक ही विश्वविद्यालय से समान पाठ्यक्रम में नामांकन क्यों लिया? इसी वजह से अब इनके नामांकन से लेकर परीक्षा देने, परिणाम जारी होने और डिग्री मिलने तक की पूरी प्रक्रिया की जांच जरूरी मानी जा रही है।
दरअसल, महिला एवं बाल विकास विभाग ने पहले ही उच्च शिक्षा विभाग से इन अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्रों की जांच कराने का अनुरोध किया था। जांच के दौरान सामने आई विसंगतियों के आधार पर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने आगे की कार्रवाई के लिए UGC को रिपोर्ट भेज दी है।
क्या कहना है विश्वविद्यालय का
वहीं, इस पूरे मामले पर राधा गोविंद विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. निर्मल मंडल का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। इस मामले का खुलासा सबसे पहले प्रभात खबर ने किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, महिला पर्यवेक्षिका परीक्षा में चयनित 33 अभ्यर्थियों की डिग्री एक ही निजी विश्वविद्यालय से मिली थी और उनके सत्र तथा अंकों में भी एकरूपता पाई गई थी।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन 33 अभ्यर्थियों की डिग्रियां नियमों के तहत जारी हुई थीं या फिर इनके नामांकन, परीक्षा और डिग्री जारी करने की प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता हुई? जांच पूरी होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी। अगर जांच में डिग्रियां फर्जी या नियमों के खिलाफ जारी होने की पुष्टि होती है, तो इन अभ्यर्थियों के चयन और नौकरी पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल इस मामले में UGC की आगे की कार्रवाई और जांच के अंतिम रिजल्ट का इंतजार है।

