Wednesday, July 22, 2026

रजत राज को पीएचडी की उपाधि, आदिवासी संस्कृति पर शोध को मिली नई पहचान

रांची: रांची में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के शोधार्थी रजत राज को आदिवासी संस्कृति पर किए गए उनके शोध के लिए पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई है। रजत राज का शोध विषय “The Tribal Culture Through the lens: Analysing Visuals of Newspapers in reference to the Nagpuri Culture of Jharkhand” रहा। इस शोध में उन्होंने समाचार पत्रों में प्रकाशित तस्वीरों और दृश्य सामग्री के माध्यम से झारखंड की नागपुरी संस्कृति का विश्लेषण किया।

मार्गदर्शन और विशेषज्ञों की भूमिका

यह शोध डॉ. अमृत कुमार के मार्गदर्शन में पूरा किया गया। वहीं, बाहरी परीक्षक (एक्सटर्नल एक्सपर्ट) के रूप में प्रोफेसर बच्चा बाबू, यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन, गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, द्वारका (दिल्ली) उपस्थित रहे। इस शोध में यह दर्शाया गया है कि मीडिया किस प्रकार आदिवासी संस्कृति को प्रस्तुत करता है और दृश्य माध्यमों के जरिए उसकी छवि कैसे बनती है। अकादमिक जगत में इस अध्ययन को एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में देखा जा रहा है।

फोटोग्राफी में भी हासिल की उपलब्धि

रजत राज ने इससे पहले फोटोग्राफी के क्षेत्र में भी अपने विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया है। वे ज़ोनल और राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। रजत राज मूल रूप से बिहार के गोपालगंज जिले के निवासी हैं, लेकिन उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा रांची में पूरी की और अब पीएचडी की उपाधि हासिल कर एक नई उपलब्धि जोड़ी है।

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विभागाध्यक्ष प्रोफेसर देवव्रत सिंह ने डॉ. रजत राज को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। विश्वविद्यालय के शिक्षकों और परिजनों ने भी इस सफलता पर खुशी जाहिर की है। रजत राज की यह सफलता न केवल उनके लिए बल्कि अन्य छात्रों और शोधार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। उनका शोध झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को समझने और उसे नई पहचान दिलाने में सहायक साबित होगा।

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एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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