रांची: वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के रांची स्थित आवास पर रविवार को काफी हलचल रही। छतरपुर विधानसभा क्षेत्र और पलामू के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक उनसे मिलने पहुंचे।
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सुबह से देर शाम तक मंत्री आवास पर समर्थकों का आना-जाना लगा रहा। बाहर से आए लोगों के रुकने के लिए अलग-अलग गेस्ट हाउस में इंतजाम किए गए।
‘हम मंत्री की सुरक्षा के लिए तैयार हैं’: समर्थक
आवास पहुंचने वालों में अशोक सोनी, अजीत वर्मा, वृज मोहन पासवान, दयानंद सिंह, उदल पासवान, राजेंद्र साव, सूर्यमुखी यादव, लौ मेहता, राजीव रंजन उपाध्याय और राजू शॉडिक समेत कई लोग शामिल थे।
समर्थकों ने कहा कि अखबारों में मंत्री के बिना सुरक्षा घूमने की खबर पढ़कर वो चिंतित हो गए। उनका कहना था कि पलामू उग्रवाद प्रभावित इलाका रहा है। ऐसे में हमारे जनप्रतिनिधि अकेले घूम रहे हैं। हम सब उनकी सुरक्षा के लिए हमेशा तैयार हैं। अब हम साथ रहेंगे।
देर शाम मंत्री ने सभी समर्थकों को वापस भेज दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में किसी को साथ आने की जरूरत नहीं है।
दूर से नजर रख रहे हैं सुरक्षा जवान
दूसरी तरफ, मंत्री की सुरक्षा में तैनात स्पेशल ब्रांच और जैप के जवान आवास से थोड़ी दूरी पर तैनात हैं। बारिश के बावजूद वो सड़क पर आने-जाने वाले लोगों पर नजर बनाए हुए हैं।
रविवार को मंत्री राधाकृष्ण किशोर पहले महानगर कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में कॉर्निवेल हॉल गए, फिर शाम को HEC स्थित पारस अस्पताल पहुंचे। इस दौरान वो बिना सुरक्षा कवर के ही निकले, जबकि जवान दूर से उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।
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गाड़ी वापस करने के नोटिस पर मंत्री का कड़ा पत्र
इस बीच, 4 जुलाई को वित्त मंत्री ने वित्त सचिव प्रशांत कुमार को पत्र लिखा है। उन्होंने संयुक्त सचिव पंकज सिंह द्वारा भेजे गए ‘गाड़ी वापस करने’ के नोटिस पर सवाल उठाए हैं।
मंत्री ने पूछा है कि किस नियम और किसके आदेश पर ये पत्र भेजा गया? अगर ये पुलिस मुख्यालय का आदेश था तो वो पत्र दिखाया जाए। उन्होंने पूरे मामले की 10 दिन में जांच रिपोर्ट मांगी है और संयुक्त सचिव पर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की है।
‘मैं सिस्टम को जवाबदेह बना रहा हूं’: मंत्री किशोर
राधाकृष्ण किशोर ने कहा, “मैं सरकार के खिलाफ नहीं हूं। मैं सिर्फ सिस्टम को जवाबदेह बना रहा हूं। मंत्री परिषद के प्रति अधिकारियों की जवाबदेही बनती है। एक तरफ राज्य के DGP को लिखे पत्र का 3 महीने तक जवाब नहीं मिलता, दूसरी तरफ एक संयुक्त सचिव सीधे मंत्री को गाड़ी वापस करने का नोटिस भेज देता है। हेमंत सोरेन की सरकार में ये नहीं चलेगा। अधिकारियों को अपनी मर्यादा में रहना होगा। कोई भी अपने दायरे से बाहर जाकर काम नहीं कर सकता।”
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