झारखंड : बोकारो जिले के पेटरवार प्रखंड के चांदो गांव में सोमवार को मातम छा गया, जब दक्षिण अफ्रीका विमान हादसे में मारे गए 20 वर्षीय पीयूष पुष्प का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा। जैसे ही एंबुलेंस गांव में दाखिल हुई, परिजनों और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। पूरे गांव में शोक का माहौल पसर गया।
Highlights:
दक्षिण अफ्रीका में कर रहे थे पायलट ट्रेनिंग
पीयूष दक्षिण अफ्रीका के वालकैन एविएशन इंस्टीट्यूट में पायलट बनने की ट्रेनिंग ले रहे थे। 10 अक्टूबर को जोहानसबर्ग में प्रशिक्षण उड़ान के दौरान अचानक विमान में तकनीकी खराबी आ गई। विमान अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया और पीयूष की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा इतना भयानक था कि विमान पूरी तरह नष्ट हो गया था।
भारतीय दूतावास और परिजनों के प्रयास से लौटा पार्थिव शरीर
हादसे के बाद भारतीय दूतावास की मदद से दस दिनों की लंबी औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। रविवार रात को पीयूष का पार्थिव शरीर भारत लाया गया और सोमवार को उनके पैतृक गांव चांदो पहुंचा। पूरे गांव ने अपने होनहार बेटे को अंतिम विदाई दी।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
पीयूष के पिता एक सेवानिवृत्त शिक्षक हैं और माता गृहिणी हैं। छोटा भाई फैशन डिजाइनर के रूप में कार्यरत है। परिवार को अपने बड़े बेटे पर गर्व था, जिसने कम उम्र में ही विदेश जाकर अपने सपनों को पंख दिए थे। लेकिन यह सपना अधूरा रह गया।
फरवरी 2026 में लौटने वाले थे भारत
पीयूष ने 18 नवंबर 2024 को दक्षिण अफ्रीका जाकर विमानन प्रशिक्षण की शुरुआत की थी। उनकी ट्रेनिंग फरवरी 2026 तक पूरी होनी थी। परिवार और दोस्तों को उम्मीद थी कि जल्द ही वह पायलट बनकर घर लौटेंगे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब
सोमवार को गांव में अंतिम संस्कार के दौरान लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सभी की आंखें नम थीं। लोगों ने कहा कि पीयूष जैसा प्रतिभाशाली युवक बहुत मुश्किल से मिलता है। वह गांव का गौरव था, जिसकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी।
ग्रामीणों ने की सरकारी मदद की मांग
ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से पीयूष के परिवार को सरकारी मदद और मुआवजा देने की मांग की है।उनका कहना है कि इस दुख की घड़ी में सरकार को परिवार के साथ खड़ा होना चाहिए। पीयूष अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी मेहनत, लगन और सपने हमेशा याद रहेंगे।


