देश : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को हरियाणा के अंबाला वायुसेना स्टेशन से फ्रांस निर्मित राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरी। यह उनके कार्यकाल का एक ऐतिहासिक क्षण रहा, क्योंकि वह भारत की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं जिन्होंने राफेल जेट में उड़ान भरी।
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राष्ट्रपति ने फ्लाइट सूट पहनकर राफेल विमान में बैठने से पहले वायुसेना अधिकारियों से विमान की तकनीक, संचालन और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी ली। टेक ऑफ से पहले उन्होंने हाथ हिलाकर जवानों का अभिवादन भी किया।

गार्ड ऑफ ऑनर और परेड का निरीक्षण
राष्ट्रपति सुबह 9:15 बजे विशेष विमान से अंबाला पहुंचीं। एयरफोर्स स्टेशन पर एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। राष्ट्रपति ने परेड का निरीक्षण किया और वायुसेना के जवानों से मुलाकात भी की। उन्होंने एयरफोर्स स्टेशन की विभिन्न यूनिटों का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों से बातचीत की।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
अंबाला जिला प्रशासन और वायुसेना ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। एयरफोर्स स्टेशन के आसपास के इलाके में ड्रोन उड़ाने पर पाबंदी लगाई गई थी। स्टेशन परिसर में मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं दी गई थी। केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई।

भारत और राफेल का संबंध
भारत ने फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान 2016 में किए गए सौदे के तहत खरीदे थे। पहली खेप 27 जुलाई 2020 को भारत पहुंची थी, जिसमें पांच राफेल विमान शामिल थे। इन विमानों ने फ्रांस के मेरिग्नैक एयरबेस से उड़ान भरकर संयुक्त अरब अमीरात के अल दफरा एयरबेस पर ठहराव किया और फिर अंबाला पहुंचे थे।
10 सितंबर 2020 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की तत्कालीन रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली की मौजूदगी में अंबाला एयरबेस पर राफेल विमानों का औपचारिक स्वागत किया गया था। इन्हें भारतीय वायुसेना की 17वीं स्क्वॉड्रन ‘गोल्डन एरोज़’ में शामिल किया गया।
राष्ट्रपति का सेना के प्रति लगाव
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हमेशा सेना से जुड़े कार्यों में विशेष रुचि दिखाई है। इससे पहले भी वे कई सैन्य कार्यक्रमों में शामिल होकर जवानों का हौसला बढ़ा चुकी हैं। राफेल में उड़ान भरकर उन्होंने एक बार फिर भारतीय वायुसेना के शौर्य और तकनीकी क्षमता के प्रति अपना सम्मान और विश्वास व्यक्त किया।


