बिहार : बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने के नोटिस के बाद सियासत तेज हो गई है। भवन निर्माण विभाग ने पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड के आवास को खाली करने के लिए आधिकारिक आदेश जारी किया है, जिसके बाद राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और तीखी हो गई है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि सरकारी आवास किसी की निजी संपत्ति नहीं होता। उन्होंने कहा कि जब कानून के तहत आवास मिलता है, तो उसे खाली करना भी नियमों के तहत होता है। लालू हों, राबड़ी हों या कोई और, नियम सब पर लागू होते हैं। अगर वे नहीं खाली करेंगे तो कानून अपना काम करेगा। गिरिराज सिंह ने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया।
उधर, राजद इस कार्रवाई को राजनीतिक साजिश बता रहा है। राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कहा कि किसी भी हालत में राबड़ी देवी आवास खाली नहीं करेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम जानबूझकर लालू परिवार को अपमानित करने के लिए उठाया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि नीतीश कुमार 20 साल से मुख्यमंत्री हैं, तो फिर अब अचानक ऐसा फैसला क्यों लिया गया?
भाजपा नेता नीरज कुमार ने तंज कसते हुए कहा कि आवास खाली करते समय सरकारी संपत्ति सुरक्षित रहे, क्योंकि पहले भी सरकारी वस्तुओं के गायब होने की शिकायतें सामने आई थीं। नोटिस के बाद लालू परिवार की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उनके छोटे भाई तेजस्वी मुख्यमंत्री बने और उसी के कुछ दिनों बाद बड़े भाई के घर को खाली करने का आदेश दे दिया गया। उन्होंने कहा कि 28 साल से इस घर से राजद समर्थकों का भावनात्मक रिश्ता रहा है और एक सरकारी आदेश में उसे खत्म कर दिया गया है। तेज प्रताप ने कहा कि इस फैसले के साथ ही नीतीश और लालू के बीच भाईचारे का रिश्ता भी खत्म हो गया।
गौर करने वाले बात यह है कि राबड़ी आवास हाल ही में तब भी चर्चा में आया था जब लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या भावुक होकर घर छोड़कर चली गई थीं। इसके बाद लालू-राबड़ी की तीन अन्य बेटियां भी वहां से चली गई थीं। रोहिणी ने परिवार और पार्टी से नाराजगी जताई थी और तेजस्वी यादव के करीबी नेताओं पर दबाव बनाने का आरोप लगाया था।
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राबड़ी देवी को यह आवास 2005 में मिला था, जब वे सत्ता से हटने के बाद मुख्यमंत्री आवास छोड़ रही थीं। उस समय भी उन्हें आवास खाली करने का नोटिस मिला था और तय अवधि में खाली नहीं करने पर विभाग ने सख्त चेतावनी दी थी। बाद में राबड़ी देवी 10 सर्कुलर रोड आवास में शिफ्ट हुईं। उल्लेखनीय है कि चारा घोटाला मामले में लालू के जेल जाने के बाद 1997 में राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया गया था और तब से उनका सरकारी आवास विवादों में समय-समय पर आता रहा है। इस बार मिले नोटिस में कहा गया है कि राबड़ी देवी को बिहार विधान परिषद के आवास के रूप में नई जगह अलॉट की गई है। सरकारी नियम के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री केवल निर्धारित अवधि तक ही आवास में रह सकते हैं, लेकिन लालू परिवार इस नोटिस को राजनीतिक दुर्भावना बता रहा है।
राजद नेताओं का कहना है कि यह कार्रवाई बदले की भावना से की गई है, जबकि बीजेपी और जेडीयू के नेताओं का कहना है कि यह पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसमें राजनीति ढूंढना गलत है। राबड़ी आवास खाली करने के मुद्दे ने बिहार में एक बार फिर सत्ता और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ा दिया है। फिलहाल लालू परिवार ने स्पष्ट कर दिया है कि वे आवास खाली नहीं करेंगे, जबकि सरकार का कहना है कि नियम तोड़ने पर कार्रवाई तय है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं।


