न्यूज डेस्क : चुनाव आयोग ने सोमवार को पं बंगाल, तमिलनाडु और केरल समेत 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की घोषणा की. आज यानी 28 अक्टूबर से शुरू हो रही यह प्रक्रिया 7 फरवरी को पूरी होगी. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अनुसार यह विशेष पुनरीक्षण दोहराए गए नामों को हटाने और मृत मतदाताओं के नाम मिटाने के लिए किया जा रहा है. हालांकि इस प्रक्रिया का उन राज्यों में विरोध हो रहा है जहां इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों की सरकार है. लेकिन महाराष्ट्र में जनवरी में स्थानीय निकायों के चुनाव होने के कारण यहां एसआईआर नहीं हो रहा है.
Highlights:
पं बंगाल में 2 नवंबर को टीएमसी की विरोध रैली

इस साल जून में बिहार से शुरू हुई SIR की कवायद अब देश के अन्य 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में भी होगी. हालांकि ऐसे कई राज्य, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होंगे, वहां एसआईआर का घोर विरोध हो रहा है. सबसे ज्यादा विरोध पश्चिम बंगाल, तमिनलाडु और केरल में हो रहा है.
इन तीनों ही राज्यों में इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों की सरकार है. तमिलनाडु में सीएम स्टालिन ने तो एसआईआर को साजिशों का जाल बताया तो वहीं पश्चिम बंगाल में टीएमसी ने 2 नवंबर को कोलकाता में एसआईआर के विरोध में विशाल रैली का आयोजन करने का ऐलान किया है. इसमें अभिषेक बनर्जी भी शामिल होंगे. बंगाल बीजेपी कहती है कि ठीक से एसआईआर हो गया तो बंगाल में एक करोड़ से अधिक अवैध वोटर्स का नाम कट जाएगा.
कांग्रेस ने विरोध को लेकर दिए ये तर्क

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने चुनाव आयोग के एसआईआर की घोषणा को लेकर पार्टी की प्रतिक्रिया में कहा कि पार्टी को इस प्रक्रिया पर तीन प्रमुख आपत्तियां हैं. पहला, जब मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, तो चुनाव आयोग देशभर में इतनी जल्दबाजी में SIR लागू करने को लेकर उत्साहित क्यों है.
दूसरा, आयोग ने बिहार में अवैध प्रवासियों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की, जबकि भाजपा इसे मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल करती रही है. और तीसरा, असम में ऐसी कोई SIR प्रक्रिया क्यों नहीं चलाई जा रही. कांग्रेस सांसद ने इसे केंद्र सरकार की नाकामी बताते हुए कहा कि यह मोदी और शाह की नीतियों पर करारा तमाचा है, क्योंकि अब तक कोई अवैध प्रवासी पकड़ा नहीं गया.
विपक्ष ने उठाए सवाल

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर की घोषणा पर कहा,”अभी तक बिहार में हुए एसआईआर से जुड़े सवालों के जवाब हमें नहीं मिले हैं. हालात ये थे कि एसआईआर को दुरुस्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट को आगे आना पड़ा. बिहार के एसआईआर से चुनाव आयोग और बीजेपी की नीयत पूरे देश के सामने आ चुकी है. जब भी एसआईआर होता है, चुनाव आयोग के कर्मचारी हर घर जाते हैं, नए वोटरों को जोड़ते हैं और जिन्हें डिलीट करना होता है, उन्हें डिलीट करते हैं.”

वहीं, राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव ने चुनाव आयोग से 14 सवाल किए हैं. उन्होंने कहा कि आयोग को यह बताना चाहिए कि बिहार में एसआईआर के अनुभव से उन्हें क्या सीख मिली और इन सीखों को ध्यान में रखते हुए एसआईआर के मूल आदेश में क्या संशोधन किए गए. उन्होंने सवाल किया, “क्या एसआईआर का उद्देश्य अवैध विदेशी नागरिकों को हटाना है? अगर हां, तो चुनाव आयोग को यह जानकारी देनी चाहिए कि बिहार में कितने विदेशी पाए गए और कितने मतदाता सूची से हटाए गए?”
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री के पी मौर्य ने कहा, “मैं इस फ़ैसले का स्वागत करता हूं. बूथ कब्ज़ा करके, गुंडागर्दी के बल पर फर्जी वोट डलवाकर चुनाव जीतने का मंसूबा पाले थे, ये लोकतंत्र का पवित्र यज्ञ है. अगर कोई घुसपैठिया घुस आया है और हमारी मतदाता सूची तक घुस गया है, तो उसे बाहर होना चाहिए.”


