Saturday, September 12, 2026

JSSC-CGL मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के आदेश को दी गई चुनौती

रांची/दिल्ली: झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (JSSC-CGL) का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। झारखंड हाईकोर्ट द्वारा नियुक्ति का रास्ता साफ किए जाने के बाद अब यह मामला देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंच गया है। अभ्यर्थियों के एक समूह ने हाईकोर्ट के हालिया फैसले को चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की है।

क्या है पूरा मामला?

बीते 3 दिसंबर 2024 को झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कथित पेपर लीक मामले में सीबीआई (CBI) जांच की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए JSSC को परिणाम जारी करने और नियुक्तियां शुरू करने का आदेश दिया था। हालांकि, अदालत ने 10 संदिग्ध अभ्यर्थियों के परिणाम पर रोक लगा दी थी, जिनका संबंध ‘नेपाल कनेक्शन’ से बताया जा रहा था।
हाईकोर्ट के इस आदेश के तुरंत बाद JSSC ने तत्परता दिखाते हुए सफल अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट जारी कर दी, जिससे हजारों छात्रों के चेहरे पर खुशी लौटी। लेकिन, परीक्षा में धांधली का आरोप लगा रहे छात्रों का दूसरा पक्ष इस फैसले से संतुष्ट नहीं है। इसलिए उन छात्रों ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

सुप्रीम कोर्ट से ‘अंतिम उम्मीद’

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले छात्रों का तर्क है कि बिना निष्पक्ष जांच (CBI) के नियुक्तियां करना उन हजारों मेहनती छात्रों के साथ अन्याय होगा जिन्होंने पारदर्शिता की उम्मीद की थी। साथ ही उन्होंने कहा कि “हम न्याय की अंतिम उम्मीद के साथ सुप्रीम कोर्ट आए हैं। हाईकोर्ट का फैसला हमें अधूरा लगा, क्योंकि पेपर लीक के साक्ष्य होने के बावजूद जांच को सीमित कर दिया गया। हमें उम्मीद है कि शीर्ष अदालत इस पर गहराई से विचार करेगी।”

मामले की वर्तमान स्थिति

फिलहाल, स्थिति बेहद पेचीदा हो गई है क्यूंकि हाई कोर्ट के आदेश के बाद आयोग ने मेरिट लिस्ट जारी कर दी है और नियुक्ति की प्रक्रिया तेज कर दिया था। अब छात्रों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जा चुकी है, लेकिन अभी इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया है।
दरअसल हाईकोर्ट के आदेशानुसार एसआईटी (SIT) अभी भी मामले की जांच कर रही है और उसे 6 महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपनी है।

आगे क्या होगा?

मामले में इतना कुछ हो जाने के बाद अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टीकी हैं। यदि सुप्रीम कोर्ट याचिका को स्वीकार कर सुनवाई शुरू करता है, तो नियुक्ति प्रक्रिया पर एक बार फिर संशय के बादल मंडरा सकते हैं। वहीं, अगर याचिका खारिज होती है, तो सफल अभ्यर्थियों के लिए सरकारी सेवा में जाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।
झारखंड की सबसे बड़ी भर्ती परीक्षाओं में से एक JSSC-CGL अब कानूनी दांव-पेंच के ऐसे मोड़ पर है, जहां से निकलने वाला फैसला राज्य के लाखों युवाओं का भविष्य तय करेगा।

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एयर नाऊ स्पेशल

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