Thursday, October 29, 2026

RSS के कार्यक्रम में बोले मोहन भागवत, ब्राह्मण ही नहीं, किसी भी जाति का बन सकता है सरसंघचालक

मुंबई : राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर मुंबई में आयोजित व्याख्यानमाला में बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र या ब्राह्मण… कोई भी सरसंघचालक बन सकता है. सिर्फ ब्राह्मण होना ही योग्यता नहीं है.

कार्यक्रम में मौजूद लोगों के साथ बातचीत के दौरान हुए सवालों के जवाब में उन्होंने कहा, “संघ का सरसंघचालक कौन बने तो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र सरसंघचालक नहीं बन सकता. जो हिंदू है वही बनेगा. जो एससी/एसटी है वह भी सरसंघचालक बन सकता है और कुछ है तो भी बन सकता है. हमारे यहां इस तरह से कार्यकर्ता नियुक्त नहीं होते कि कौन किस जाति का है. जो काम करेगा वह होगा.”

संघ प्रमुख ने कहा, “जब संघ की शुरुआत हुई थी तो यह छोटा था. एक छोटी सी बस्ती में संघ का काम शुरू हुआ और वह ब्राह्मण बस्ती थी. तो पहले संघ से सभी पदाधिकारी ब्राह्मण ही रहते थे। लोग कहते थे कि संघ ब्राह्मणों का ही है और आज भी कहते हैं क्योंकि लोग यही देखते हैं कि अपने कितने हैं? लेकिन ऐसा नहीं है।”

मोहन भागवत ने आगे कहा, “अब संघ बढ़ गया है और हम जाति में विभाजित करके विस्तार नहीं करते। हम भौगौलिक क्षेत्र में बढ़ाते हैं। 10-10 हजार की बस्ती होती है, शहरों में और हर बस्ती में काम होना चाहिए। 10-10, 12-12 गांव का ग्रुप होता है मंडल में और हर मंडल में काम होना चाहिए। भौगौलिक रूप से बढ़ते हैं तो सभी बस्तियां संपर्क में आती हैं। सभी जाति के लोग आते हैं।”

आरएसएस चीफ ने कहा, “आज आप देखेंगे कि अखिल भारतीय स्तर पर भी सिर्फ एक जाति के लोग नहीं हैं, सभी जातियों के लोग हैं। यह स्वाभाविक बात संघ में होती है। इसलिए, एससी-एसटी होने अयोग्यता नहीं और ब्राह्मण होना योग्यता नहीं।”

एयर नाऊ स्पेशल

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