Monday, April 20, 2026

झारखंड के 4 जिलों में तैयार होगा मेडिकल कॉलेज, कैबिनेट की मंजूरी से बेहतर होगी स्वास्थ्य व्यवस्था

न्यूज डेस्क: झारखंड मंत्रिमंडल की बैठक में बुधवार को धनबाद, जामताड़ा, गिरिडीह और खूंटी के सदर अस्पतालों को पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज के रुप में उन्नत की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है. इसके साथ ही विदेशों में मेडिकल ग्रेजुएट की पढ़ाई कर रहे छात्रों को राज्य के मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप के दौरान स्टाईपंड की भी मंजूरी दी गई. अब एफएमजी इंटर्न को 17500 रुपए स्टाईपंड मिलेगा. खूंटी में 50 एमबीबीएस सीटें, जामताड़ा में 100 एमबीबीएस सीटें, धनबाद में 100 एमबीबीएस सीटें और गिरिडीह में 100 एमबीबीएस सीटें है.

मेडिकल शिक्षा का अवसर

इस फैसले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों की कमी के कारण हमारे राज्य में डॉक्टरों की भारी कमी रही है. मैं स्वयं इसका एक उदाहरण हूं, मुझे अपनी मेडिकल शिक्षा के लिए राज्य से बाहर जाना पड़ा था. स्थानीय स्तर पर डॉक्टरों को तैयार करना स्थायी समाधान है क्योंकि बाहर के डॉक्टर राज्य में आने से कतराते है.

राज्य में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ने से स्थानीय युवाओं को मेडिकल शिक्षा का अवसर मिलेगा. डॉक्टरों की कमी दूर होगी और उच्च स्तरीय इलाज की सुविधा राज्य में उपलब्ध होगी. स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के साथ रोजगार के लिए भी नए मार्ग मिलेंगे. मरीजों को बाहर जाने की जरुरत कम होगी और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा.

पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज

राज्य सरकार ने बीते अक्तूबर 4 जिलों में मेडिकल कॉलेज के प्रस्ताव को सहमति दी थी. मेडिकल कॉलेजों का स्थापना पीपीपी मोड में की जाएगी. इसकी स्वीकृति भारत सरकार ने दे दी है. परियोजना का संचालन वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर संचालित व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण, यानी वीजीएफ की उप योजना 1-2 के अंतर्गत कार्यान्वित की जाएगी.

30%- 30% का अनुपात

मेडिकल कॉलेज धनबाद परियोजना वीजीएफ उपयोजना-1 के तहत, खूंटी, जामताड़ा और गिरिडीह मेजिकल कॉलेज परियोजना वीजीएफ उपयोजना-2 के तहत कार्यान्वित होंगे. इस उप योजना-2 के तहत भारत सरकार 40% पूंजीगत व्यय सहायता तथा 25% परिचालन व्यय सहायता प्रदान करेगा.

वहीं झारखंड सरकार 25%- 40% तक पूंजीगत व्यय तथा 15%- 25% तक परिचालन व्यय सहायता के रुप में योगदान देगी. उपयोजना-1 के तहत पूंजीगत सहायता के रुप में भारत सरकार से 30% प्रतिशत और राज्य सरकार से 30% अनुपात में प्रदान की जाएगी.

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