झारखंड : झारखंड में DMFT (District Mineral Foundation Trust) फंड से जुड़े घोटालों का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। इस पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बोकारो में उजागर हुआ घोटाला सिर्फ एक झांकी था, जबकि भ्रष्टाचार पूरे राज्य में फैला है। उन्होंने दावा किया कि अब धनबाद और कोडरमा से भी डीएमएफटी फंड घोटाले के नए तथ्य सामने आ रहे हैं।
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क्या है डीएमएफटी फंड?
डीएमएफटी फंड उन जिलों में खर्च किया जाता है जहां खनन होता है और जहां इससे प्रभावित लोगों के जीवन और विकास की जरूरत होती है। यह फंड स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पानी, कौशल विकास और अन्य जनहित कार्यों पर खर्च किया जाना चाहिए। लेकिन झारखंड में लगातार आरोप लग रहे हैं कि इस फंड का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है और धन गलत तरीके से ठेकेदारों तथा अधिकारियों की जेब में जा रहा है।
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धनबाद और कोडरमा में भी बड़े घोटाले के संकेत
मरांडी ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार में अधिकारी अनुभव ही नहीं, बल्कि अपने पुराने दलालों और ठेकेदारों को भी साथ लेकर चलते हैं। उन्होंने कहा कि कोडरमा में डीसी रहने के दौरान आदित्य रंजन ने डीएमएफटी फंड को “स्किल डेवलपमेंट” के नाम पर लूटा था। यह गड़बड़ी MEPSC और तितली फाउंडेशन के साथ सांठगांठ कर की गई। अब जब वे धनबाद के डीसी बने हैं तो उसी तरीके से दोबारा लूट शुरू हो गई है। मरांडी के अनुसार, टेंडर की शर्तों में बदलाव कर मनचाही कंपनियों को फायदा पहुँचाने की कोशिश हो रही है।
मरांडी की जांच की मांग
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि कोडरमा में वर्ष 2022–24 के दौरान खर्च किए गए डीएमएफटी फंड की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि आदित्य रंजन और प्रांजल मोदी के बीच के रिश्तों की जांच होना जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने धनबाद में डीएमएफटी फंड से जुड़ी चल रही सभी टेंडर प्रक्रियाओं को तत्काल रोकने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।


