गुवाहाटी: असम की राजनीति में इस बार एक नया रंग देखने को मिल रहा है। गांडेय विधायक कल्पना सोरेन और सांसद जोबा माझी ने चबुआ विधानसभा सीट से JMM प्रत्याशी भूबेन मुरारी के पक्ष में प्रचार की कमान संभाल ली है।
असम में JMM की यह सक्रियता महज एक चुनावी खानापूर्ति नहीं, बल्कि उन लाखों टी-ट्राइब्स (चाय जनजाति) से जुड़ने की कोशिश है, जिनका नाता सीधे तौर पर झारखंड से है।
Highlights:
मजदूरों के बीच पहुंचीं कल्पना
प्रचार का सबसे दिलचस्प हिस्सा वह रहा जब कल्पना सोरेन बिना किसी तामझाम के सीधे चाय बागानों में उतर गईं। टोकरी थामे चाय की पत्तियां चुन रहे मजदूरों के बीच पहुंचकर उन्होंने न केवल उनका हाल जाना, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक संघर्षों को भी करीब से महसूस किया।
चर्चा में रहे मजदूरों के मुद्दे
संवाद के दौरान मजदूरों ने अपनी रोजमर्रा की समस्याओं का पिटारा खोल दिया। कल्पना सोरेन ने मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया:
उचित मजदूरी: काम के बदले मिलने वाले वेतन और महंगाई के बीच का असंतुलन।
स्वास्थ्य सेवाएं: बागान इलाकों में बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं का अभाव।
आवास: रहने की जर्जर स्थिति और मालिकाना हक की कमी।
चबुआ में त्रिकोणीय मुकाबले की आहट
JMM ने इस बार असम की 21 सीटों (नामांकन रद्द होने के बाद अब 18-19 सीटों पर सक्रिय) पर उम्मीदवार उतारकर कांग्रेस और भाजपा दोनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। चबुआ में भूबेन मुरारी के समर्थन में जुटी भीड़ यह संकेत दे रही है कि JMM स्थानीय मुद्दों और झारखंडी पहचान के जरिए एक बड़ा वोट बैंक साधने की तैयारी में है।
क्यों अहम है यह दौरा?
असम में लगभग 70 लाख चाय जनजाति के लोग रहते हैं, जो कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। कल्पना सोरेन की सादगी और सीधा संवाद महिला मतदाताओं को खासा प्रभावित कर रहा है। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में JMM अब क्षेत्रीय पार्टी के दायरे से बाहर निकलकर खुद को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की ओर अग्रसर है।

