रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा में हुई कथित अनियमितता और पेपर लीक मामले में जेल में बंद मुख्य आरोपी अभय तिवारी की पत्नी सुषमा देवी और भाई अक्षय तिवारी की जमानत याचिका पर सीआईडी (CID) की विशेष अदालत में बहस पूरी हो गई है। कोर्ट ने इस मामले में विस्तृत सुनवाई के लिए 9 सितंबर की तारीख तय की है।
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CID और बचाव पक्ष के बीच तीखी बहस
गुरुवार को CID की विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दोनों आरोपियों को जमानत देने के पक्ष में अपनी दलीलें पेश कीं। साथ ही ये भी कहा कि इस पूरे मामले में दोनों की कोई भूमिका नहीं है, इसलिए अविलंब जमानत दी जाए। वहीं दूसरी ओर, CID के वकील ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि यह एक गंभीर परीक्षा धांधली से जुड़ा मामला है जिसकी वजह से लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटका है।
सीआईडी इस पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए डिजिटल और फॉरेंसिक सबूत जुटा रही है। इस बीच इन्हें जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है। वहीं दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित न रखकर अगली सुनवाई की तिथि निर्धारित कर दी।
मास्टरमाइंड समेत पूरा परिवार सलाखों के पीछे
JSSC CGL परीक्षा अनियमितता मामले में CID की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे प्रकरण में CID ने कांड संख्या 1/2025 दर्ज कर मुख्य आरोपियों पर शिकंजा कसा है। सीआईडी ने परीक्षा धांधली के मुख्य आरोपी अभय तिवारी को जुलाई 2026 में ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। वहीं मामले में मिलीभगत और सबूतों के आधार पर कार्रवाई करते हुए सीआईडी ने अभय की पत्नी सुषमा देवी और भाई अक्षय तिवारी को अगस्त 2026 में गिरफ्तार किया था।

