रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) CGL पेपर लीक मामले में एसआईटी को बड़ी सफलता मिली है। सीआईडी और एसआईटी की संयुक्त कार्रवाई में इस हाई-प्रोफाइल धांधली गिरोह के चार और सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके साथ ही दिल्ली से दबोचे गए मुख्य साजिशकर्ताओं को अदालत ने 5 दिनों की एसआईटी रिमांड पर भेज दिया है।
Highlights:
धनबाद और बोकारो से 4 नए आरोपी दबोचे गए
एसआईटी सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार नए आरोपियों की पहचान दीपक कुमार, उमेश कुमार राय, विजय कुमार तिवारी और आनंद कुमार सिंह के रूप में हुई है। इनमें से दीपक, विजय और आनंद को धनबाद से, जबकि उमेश राय को बोकारो से गिरफ्तार किया गया। ये सभी आरोपी परीक्षा संचालन करने वाली कोलकाता की कंपनी वेबल (Webel) के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष संपर्क में थे। फिलहाल गुप्त स्थान पर इनसे गहन पूछताछ जारी है।
वेबल कंपनी के प्रतिनिधि सोमांश और राहुल 5 दिन की रिमांड पर
इस मामले में एसआईटी ने परीक्षा आयोजित करने वाली वेबल कंपनी के स्थानीय प्रतिनिधि सोमांश प्रकाश और उसके सहयोगी राहुल कुमार को दिल्ली के बुराड़ी क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। अदालत ने दोनों आरोपियों को 5 दिनों की पुलिस रिमांड पर एसआईटी के हवाले कर दिया है।
जांच में खुलासा हुआ है कि वेबल कंपनी ने परीक्षा संचालन का जिम्मा गैर-कानूनी ढंग से सोमांश प्रकाश की निजी फर्म ‘मां चामुंडेश्वरी’ को हस्तांतरित कर दिया था। रिमांड के दौरान एसआईटी वेबल कंपनी के अधिकारियों की संलिप्तता और लेनदेन से जुड़े वित्तीय नेटवर्क का पर्दाफाश करेगी।
बोकारो में अभ्यर्थियों को रटाए गए थे प्रश्नोत्तर
मामले की कड़ियां जोड़ते हुए सीआईडी पहले ही TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी, उसकी पत्नी सुषमा तिवारी और भाई अक्षय तिवारी को गिरफ्तार कर चुकी है। पूछताछ में स्वीकार किया गया था कि दर्जनों परीक्षार्थियों को बोकारो के गुप्त ठिकानों पर रखकर प्रश्नोत्तर रटाए गए थे।
एसआईटी अब इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन और इसमें शामिल अन्य बड़े चेहरों की पहचान करने में जुटी है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना है।


