झारखंड : झारखंड में डीजीपी को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहा सस्पेंस आखिरकार गुरूवार देर शाम खत्म हो गया जब गृह विभाग ने दो अलग अलग अधिसूचनाएं जारी कर यह जानकारी दी कि 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी और वर्तमान डीजीपी अनुराग गुप्ता का वीआरएस का आवेदन सरकार ने स्वीकार कर लिया है और 1994 बैच की आईपीएस अधिकारी व गृह विभाग में विशेष सचिव के पद पर पदस्थापित तदाशा मिश्रा झारखंड की पहली महिला और नई प्रभारी डीजीपी होंगी. अधिसूचना जारी होने के साथ ही तदाशा मिश्रा कौन हैं, वर्तमान में क्या वह सबसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों में से एक हैं, अब तक पुलिस अधिकारी के रूप में कौन-कौन से पदों को संभाल चुकी हैं, साथ ही कैसे उन्हें झारखंड की पहली महिला डीजीपी होने का अवसर मिला, यह जानने को लेकर लोगों में कई दिलचस्पी देखने को मिली. गुरूवार रात से ही वह झारखंड में गूगल में सबसे ज्यादा सर्च करने वाली ट्रेंडिंग टॉपिक के रूप में उभर कर सामने आई हैं.
तदाशा मिश्रा झारखंड कैडर की 1994 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं, नई प्रभारी डीजीपी बनाये जाने से पहले वह गृह विभाग में विशेष सचिव के पद पर पदस्थापित हैं. इससे पहले उन्होंने एडीजी रेल का दायित्व संभाला. संयुक्त बिहार- झारखंड में कभी रांची के सिटी एसपी का पद संभाल चुकी तदाशा मिश्रा मूल रूप से ओडिशा की रहने वाली हैं और वर्तमान में झारखंड में आईपीएस अधिकारियों के वरीयता क्रम में चौथे स्थान पर हैं. डीजी रैंक में उनसे सीनियर तीन अधिकारी हैं जिनमें 1990 बैच के अनिल पाल्टा, 1992 बैच के प्रशांत सिंह और 1993 बैच के एमएस भाटिया शामिल हैं. प्रभारी डीजीपी के रूप में उनका कार्यकाल केवल 55 दिनों का ही होगा, क्योंकि वह 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्ति हो रही हैं, ऐसे में प्रभारी डीजीपी के रूप में उनका कार्यकाल अब तक के सभी डीजीपी के कार्यकालों में सबसे छोटा रहने वाला है.
तदाशा मिश्रा डीजीपी जी एस रथ के कार्यकाल में पुलिस मुख्या में डीआईजी कार्मिक के पद पर भी कार्य कर चुकी हैं. इसके अलावा उन्होंने एडीजी जैप, एडीजी रेल का भी दायित्व संभाल चुकी हैं. डीजीपी के पद के लिए यूपीएससी की नियमावली हो या राज्य सरकार की नई नियमावली हो, दोनों ही नियमावली के तहत डीजीपी पद पर नियमित पदस्थापन के लिए सेवानिवृत्ति की तिथि कम से कम छह महीने रहना अनिवार्य है। ऐसे में इस नियमावली के तहत तदाशा मिश्रा को अवधि विस्तार नहीं मिल सकता है। तदाशा मिश्रा के प्रभारी डीजीपी बनने के साथ ही राज्य के नियमित डीजीपी की खोज भी अब शुरू हो जाएगी। जल्द ही राज्य सरकार इसकी प्रक्रिया पूरी करेगी।
तदाशा मिश्रा ने अपने 30 साल के करियर में राज्य के कई जिलों में एसपी के अलावा डीआईजी और आईजी के रूप में भी काम किया है। उन्हें प्रशासनिक कुशलता और अनुशासनप्रियता के लिए जाना जाता है। झारखंड में महिला सशक्तिकरण, साइबर अपराध नियंत्रण और नक्सल प्रभावित इलाकों में कानून व्यवस्था सुधारने में उनके योगदान को विशेष रूप से सराहा गया है। उनकी नियुक्ति को राज्य में महिला नेतृत्व के उभार के रूप में देखा जा रहा है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मिश्रा का कार्यकाल पुलिस विभाग में सकारात्मक बदलाव लाने वाला साबित हो सकता है, खासकर नक्सल प्रभावित जिलों में। तदाशा मिश्रा के कार्यभार संभालने के बाद झारखंड पुलिस से उम्मीद की जा रही है कि वह नक्सलवाद, साइबर अपराध और महिला सुरक्षा पर फोकस बढ़ाएगी।
झारखंड की पहली महिला डीजीपी बनी तदाशा मिश्रा से जुड़ा एक दुखद पहलू यह भी है कि साल 2018 के दिसंबर महीने के अंत में जब उन्हें डीजी रैंक में प्रमोशन मिला था तो ठीक उसके अगले ही दिन उनके इकलौते बेटे अतेंद्र अन्वेष ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी. वह बंगलुरू में रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था. घटना को लेकर उस समय बताया गया था कि वह डिप्रेशन का शिकार था, इसके कारण ही उसने खुद को गोली मार ली थी, गंभीर स्थिति में उन्हें अस्पताल ले जाया गया था, जहां उनकी मौत हो गई.


