Wednesday, July 22, 2026

लातेहार में बनेगा झारखंड का पहला टाइगर सफारी, सीएम हेमंत सोरेन ने तैयारियों का देखा प्रेजेंटेशन

झारखंड :  मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने शुक्रवार को लातेहार जिला में बनने वाले झारखंड के पहले प्रस्तावित टाइगर सफारी प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन देखा. इस मौके पर मुख्यमंत्री के समक्ष अधिकारियों ने टाइगर सफारी प्रोजेक्ट से संबंधित विस्तृत जानकारी रखी. मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने अवगत कराया कि यह प्रोजेक्ट झारखंड का पहला टाइगर सफारी प्रोजेक्ट होगा. लातेहार जिला के पुटूवागढ़ क्षेत्र में इसका निर्माण किया जाना प्रस्तावित है जो पलामू टाइगर रिजर्व से बाहर का क्षेत्र है. इसे लेकर विभाग द्वारा भूमि चिन्हित कर ली गई है.

अधिकारियों के अनुसार टाइगर सफारी प्रोजेक्ट बेतला नेशनल पार्क के नजदीक क्षेत्र में बनाए जाने की योजना है. टाइगर सफारी प्रोजेक्ट बनने से डाल्टनगंज, बरवाडीह, मंडल डैम क्षेत्र के स्थानीय ग्रामीणों को आजीविका का बेहतर साधन मिलेगा. मुख्यमंत्री के समक्ष अधिकारियों ने यह जानकारी दी कि इस प्रोजेक्ट के बनने से पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) क्षेत्र के इको टूरिज्म सर्किट, जो नेतरहाट-बेतला-केचकी से लेकर मंडल डैम तक विस्तारित है, इसके विकास में यह प्रोजेक्ट एक महत्वपूर्ण कड़ी बनेगी.

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को अधिकारियों ने बताया कि टाइगर सफारी परियोजना की स्थापना निर्धारित सभी मानकों का अनुपालन करते हुए की जायेगी. टाइगर सफारी बनने से इस क्षेत्र के समुचित विकास की पूरी संभावना है. इस योजना के विस्तार से टूरिज्म क्षेत्र में पर्यटकों के लिए बाघों और अन्य वन्यजीवों को करीब से देखने का एक आकर्षक और नया मौका होगा. यह झारखंड का पहला टाइगर सफारी होगा, जिसका उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न करना है.

इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने टाइगर सफारी प्रोजेक्ट से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी ली तथा अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी दिए. इस मौके पर मंत्री सुदिव्य कुमार, विधायक कल्पना सोरेन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वाइल्डलाइफ परितोष उपाध्याय, पलामू टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एस०आर० नाटेश, उप निदेशक पलामू टाइगर रिजर्व प्रजेश जेना, कंसल्टेंट अशफाक अहमद सहित अन्य मौजूद थे.

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एयर नाऊ स्पेशल

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न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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