Saturday, October 31, 2026

बोकारो ट्रेजरी से 11 करोड़ की अवैध निकासी मामले में एएसआई अशोक भंडारी समेत तीन की जमानत याचिका खारिज

राँची: झारखंड के बोकारो कोषागार (ट्रेजरी) से करीब 11 करोड़ रुपये की सनसनीखेज अवैध और फर्जी निकासी मामले में जेल में बंद तीन पुलिसकर्मियों को अदालत से बहुत बड़ा झटका लगा है। सीआईडी के विशेष न्यायाधीश कुलदीप की अदालत ने बुधवार को मामले की गंभीरता को देखते हुए लेखा शाखा के एएसआई (ASI) अशोक भंडारी, गृह रक्षक (होमगार्ड) सतीश कुमार और सिपाही काजल मंडल की नियमित जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का गहन अवलोकन करने के बाद माना कि सरकारी खजाने में इतनी बड़ी सेंध लगाने के इस संगठित खेल में आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया गंभीर साक्ष्य मौजूद हैं। ऐसे में इन्हें बेल देना जांच को प्रभावित कर सकता है।

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ऑडिट रिपोर्ट से खुला था महाघोटाला, मुख्य आरोपी के बाद नपे वर्दीवाले

जांच के अनुसार, इस महाघोटाले की शुरुआत बोकारो जिला पुलिस कार्यालय की लेखा शाखा में फर्जी और अवैध तरीके से वेतन की निकासी से हुई थी। अधिकारियों की नाक के नीचे करोड़ों रुपये का यह खेल लंबे समय तक चलता रहा। लेकिन जब महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट आई, तो इस भारी वित्तीय घालमेल को देखकर सबके होश उड़ गए। इसके तुरंत बाद राज्य के वित्त विभाग ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए थे।

बोकारो में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सबसे पहले इस पूरे खेल के मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड कौशल पांडेय को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। मुख्य आरोपी कौशल पांडेय की गिरफ्तारी के बाद जब सीआईडी और स्थानीय पुलिस ने कड़ियों को जोड़ना शुरू किया, तो इस गबन का दायरा बढ़ता चला गया। जांच में पता चला कि लेखा शाखा में तैनात एएसआई अशोक भंडारी, होमगार्ड सतीश कुमार और महिला सिपाही काजल मंडल की भी इस अवैध निकासी में गहरी संलिप्तता और मिलीभगत थी। पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद पुलिस ने इन तीनों को भी गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया था।

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अदालत में हुई तीखी बहस, 18 जून को सुरक्षित रख लिया था फैसला

बुधवार को कोर्ट में इन तीनों पुलिसकर्मियों की जमानत याचिकाओं पर दोनों पक्षों के वकीलों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। आरोपियों के वकीलों ने उन्हें निर्दोष बताते हुए दलील दी कि वे लंबे समय से कस्टडी में हैं, इसलिए उन्हें जमानत मिलनी चाहिए। वहीं सरकारी वकील ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह जनता की गाढ़ी कमाई और करोड़ों रुपये के सरकारी राजस्व के गबन का संगीन मामला है। अगर आरोपी बाहर आते हैं, तो वे जांच और सबूतों को प्रभावित कर सकते हैं। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बीती 18 जून को ही अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे बुधवार को सुनाते हुए तीनों आरोपियों की याचिकाएं खारिज कर दीं। इस फैसले के बाद साफ है कि 11 करोड़ के इस पुलिस महकमे के घोटाले में शामिल आरोपियों की मुश्किलें अब और बढ़ने वाली हैं।

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एयर नाऊ स्पेशल

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