रांची: झारखंड में कई सालों के इंतजार के बाद हुए नगर निकाय चुनाव कई आरोपों, गड़बड़ियों और हिंसा की घटनाओं के चलते विवादास्पद ढंग से सोमवार को सम्पन्न हो गई. राजधानी रांची से लेकर राज्य के अलग अलग जिलों में मतदाता पूरे दिन अपने वोट के अधिकार को लेकर मतदानकर्मियों और प्रशासनिक अमला से जूझते नजर आये. सबसे ज्यादा गड़बड़ियों के आरोप लगे मतदाता सूची से नाम बाहर होने का या फिर एक ही परिवार के सदस्यों का नाम अलग अलग वार्ड में कर दिये जाने का,जिसके कारण कई मतदाता मतदान नहीं कर सके.
राजधानी रांची में इस बार निर्वाचन आयोग ने जारी वोटर लिस्ट में एक ही परिवार को अलग-अलग बूथ पर नाम दे दिया था। घर एक, परिवार एक, वार्ड संख्या एक लेकिन मतदान केंद्र अलग-अलग। शहर के सैकड़ों परिवार निर्वाचन आयोग से परेशान दिखे। परेशान होने वालों में पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार बलबीर दत्त भी शामिल हैं.
उन्होंने बताया कि 1957 से मतदान करता आ रहा हूं। पहली बार हुआ कि वोट नहीं दे पाया। जिस बूथ पर मतदान करता आ रहा था, वहां नाम ही नहीं था। वहां के पीठासीन अधिकारियों ने बताया कि यहां से एक-दो किमी दूर बूथ केंद्र है, वहां देखिए। थके-हारे परेशान 91 साल के बलबीर दत्त भारी मन से घर लौट आए। उन्होंने कहा कि लोकसभा-विधानसभा के चुनाव में वही बूथ पर, नगर निगम चुनाव में बदलने की क्या जरूरत थी? इसी तरह अरगोड़ा निवासी एक व्यक्ति का बूथ लगभग आठ किलोमीटर दूर नामकुम के स्कूल में चला गया था।
नगर निकाय चुनाव के दौरान राजधानी के कई मतदान केंद्रों पर मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर नाराजगी देखने को मिली। कई जगह नाम नहीं मिलने पर हंगामे की स्थिति बन गई। पहचान पत्र और आधार कार्ड लेकर पहुंचे अनेक मतदाताओं को सूची में नाम न होने के कारण निराश लौटना पड़ा। कई मामलों में मतदाताओं के नाम एक वार्ड से हटाकर दूसरे वार्ड में जोड़ दिए गए, जबकि कई परिवारों के सदस्यों के नाम अलग-अलग बूथों में दर्ज मिले। पहली बार मतदान करने पहुंचे युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक को इस अव्यवस्था का सामना करना पड़ा।
बूथ परिवर्तन की पूर्व सूचना नहीं मिलने, ऑनलाइन जानकारी और वास्तविक सूची में अंतर तथा स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव से भ्रम की स्थिति बनी रही। मतदाताओं ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि मतदान लोकतंत्र में भागीदारी का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन सूची की त्रुटियों के कारण वे अपने अधिकार का प्रयोग नहीं कर सके। मतदाताओं ने सूची सुधार और सूचना व्यवस्था को अधिक पारदर्शी व सटीक बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

