रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि महज UAPA आरोपी से पारिवारिक संबंध होने के आधार पर संपत्ति आतंकवाद से हुई कमाई से अर्जित संपत्ति नहीं मानी जा सकती. जस्टिस रंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने UAPA मामले में आरोपी बिनोद कुमार गंझू की पत्नी सुशीला देवी की स्कूटी की कुर्की को रद्द करने का आदेश दिया है.
Highlights:
इसे भी पढ़ें : रांची में जारी छात्रों के आंदोलन में जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने सीएम हेमंत सोरेन से मांगा इस्तीफ़ा, बताई ये वजह
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब किसी महिला की अपनी स्वतंत्र आय का स्रोत हो और संपत्ति उसके नाम पर पंजीकृत हो, तो केवल आरोपी की पत्नी होने के नाते उसकी संपत्ति जब्त नहीं की जा सकती. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पेश किए इन तथ्यों को माना कि UAPA मामले में आरोपी बिनोद कुमार गंझू की पत्नी सुशीला देवी सीसीएल में कार्यरत हैं और उनका मासिक वेतन लगभग 82 हजार रुपये है. उन्होंने यह स्कूटी दिसंबर 2018 में खरीदी थी, जबकि छापेमारी जनवरी 2016 में हुई थी. सुनवाई के दौरान पीठ ने माना कि महिला के पास वाहन खरीदने की पर्याप्त आर्थिक क्षमता थी.
मामला टीपीसी के नाम पर लेवी से जुड़ा
बता दें, यह मामला टंडवा के अमरपाली-मगध कोयला क्षेत्र में कोयला कारोबारियों और DO धारकों से प्रतिबंधित संगठन तृतीय प्रस्तुति समिति (TPC) के नाम पर लेवी वसूली से जुड़ा है, जिसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने की है. जांच के दौरान पुलिस ने जनवरी 2016 में बिनोद कुमार गंझू के घर से करीब 91.75 लाख रुपये नकद बरामद किए थे. गंझू पर मगध संचालन समिति के अध्यक्ष के रूप में लेवी की रकम TPC तक पहुंचाने का आरोप है. जांच के दौरान ही विनोद गंझू के परिजनों के नाम पर दर्ज कई संपत्तियां जब्त की गई थीं.

